भारत सरकार कोयला खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने के लिए ₹40,000 करोड़ का कोष बना रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

मुख्य बातें

  • भारत में अब तक 341 कोयला खदानें बंद या परित्यक्त अवस्था में हैं।
  • सरकार ने खदान बंदी के लिए ₹40,000 करोड़ का कोष निर्धारित किया है।
  • आने वाले वर्षों में 105 से अधिक खदानों को वैज्ञानिक रूप से बंद करने का लक्ष्य है।
  • खदानों को पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों में बदलने की योजना है।

भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है, अब 'निकालो और छोड़ो' (extract-and-abandon) के पुराने मॉडल को बदलकर चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने खदानों के वैज्ञानिक समापन के लिए ₹40,000 करोड़ का एक विशाल कोष तैयार किया है, जिसका उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करना है।

कोयला मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 42 खदानें बंद की जा चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य अब 105 से अधिक खदानों को वैज्ञानिक पद्धति से बंद करना है। इस प्रक्रिया में 25% राशि (लगभग ₹10,000 करोड़) सीधे सामुदायिक विकास, बुनियादी ढांचे और कौशल विकास पर खर्च की जाएगी, जिससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल केवल पर्यावरणीय सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नए 'ग्रीन सर्विस इंडस्ट्री' को जन्म दे रही है। वैज्ञानिक खदान बंदी से कार्बन मार्केट, ईएसजी (ESG) प्रदर्शन और एमएसएमई (MSMEs) के लिए नए द्वार खुलेंगे। यह भारत के 2070 तक 'नेट-जीरो' लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

खदान बंदी के शब्द को अब 'धन की खान' (Mine of Wealth) में बदलने का समय आ गया है।

इस मिशन को सफल बनाने के लिए कोयला नियंत्रक संगठन ने RECLAIM, L.I.V.E.S., और SUVIKALP जैसे विशेष कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अलावा, भारत ने इस क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने के लिए जर्मनी की GIZ संस्था के साथ भी समझौता किया है।

वैश्विक उदाहरण और तुलना

दुनिया भर में बंद खदानों को सफलतापूर्वक पर्यटन केंद्रों में बदला गया है। नीचे दी गई तालिका कुछ प्रमुख उदाहरणों को दर्शाती है:

देशपुरानी खदान का स्वरूपवर्तमान उपयोग
यूके (UK)चाइना क्ले पिटबोटैनिकल गार्डन (Eden Project)
पोलैंडनमक की खदानयूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
जर्मनीकोयला बेल्टसांस्कृतिक अर्थव्यवस्था केंद्र
रोमानियानमक की खदानअंडरग्राउंड एम्यूजमेंट पार्क
क्या आप जानते हैं?: भारत में 31 मार्च, 2024 तक कुल 341 कोयला खदानें बंद या परित्यक्त अवस्था में दर्ज की गई थीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. वैज्ञानिक खदान बंदी क्या है?
यह खदान के समाप्त होने के बाद उसे सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और आर्थिक रूप से उत्पादक बनाने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है।

2. सामुदायिक विकास के लिए कितना पैसा आवंटित किया गया है?
कुल कोष का 25% हिस्सा स्थानीय समुदायों के विकास और रोजगार सृजन के लिए आरक्षित है।