ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के नवीनतम आंकड़े दर्शाते हैं कि 2023‑24 शैक्षणिक वर्ष में कुल नामांकन 4.5 करोड़ तक पहुँच गया है। महिला छात्रों और शेड्यूल्ड कास्ट‑सूट्रेड (SC), शेड्यूल्ड ट्राइब्स (ST) तथा ओबीसी जैसे हाशिये के वर्गों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली ने पिछले दशक में तीव्र विस्तार देखा है, और 2023‑24 शैक्षणिक वर्ष में कुल छात्र‑नामांकन 4.5 करोड़ पर पहुँच गया है। यह आंकड़ा 2014‑15 में 3.42 करोड़ के स्तर से 31.5% की वृद्धि दर्शाता है, जैसा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी AISHE रिपोर्ट में बताया गया है। सर्वे ने 59,533 संस्थानों से डेटा एकत्र किया, जिससे 90% से अधिक संस्थागत भागीदारी सुनिश्चित हुई।
लिंग समानता में स्थायी प्रगति
जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) 2023‑24 में 1.08 रहा, जो सात लगातार वर्षों से 1.0 से ऊपर है। इसका मतलब है कि महिला छात्रों की भागीदारी निरंतर पुरुषों से अधिक रही है। 18‑23 आयु वर्ग के लिए कुल जन enrolment ratio (GER) 30 पर रहा, जबकि महिलाओं का GER 31.2 तक पहुँच गया, जो राष्ट्रीय औसत से ऊपर है।
हाशिये के समूहों की भागीदारी में उछाल
शेड्यूल्ड कास्ट (SC) छात्रों की संख्या 2014‑15 से 51.4% बढ़कर 69.72 लाख हो गई, उनका GER 18.9 से 27.8 तक बढ़ा। शेड्यूल्ड ट्राइब (ST) समूह में 75.7% की तेज़ी से वृद्धि के साथ छात्र संख्या 28.83 लाख पहुँची, GER 13.5 से 22.8 तक बढ़ा। ओबीसी वर्ग में 60.2% वृद्धि हुई, जिससे कुल छात्र‑संख्या 1.13 करोड़ से 1.80 करोड़ तक पहुँची।
STEM और शिक्षकों में महिला प्रतिनिधित्व
STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, गणित) कोर्स में नामांकन 1.02 करोड़ तक पहुँच गया, और महिलाओं का हिस्सा 38.4% से बढ़कर 44% हो गया। साथ ही, शैक्षणिक कार्यबल में महिला शिक्षकों की संख्या 7.78 लाख तक पहुँची, जो कुल शिक्षकों का 44.9% बनता है। यह परिवर्तन न केवल लैंगिक समानता को सुदृढ़ करता है, बल्कि भारत की नवाचार‑उन्मुख अर्थव्यवस्था को भी बल देता है।
भविष्य की दिशा और चुनौतियां
डेटा स्वयं‑रिपोर्टेड होने के कारण, गुणवत्ता नियंत्रण मुख्यतः संस्थानों की ज़िम्मेदारी है। फिर भी, इस रिपोर्ट से स्पष्ट संकेत मिलता है कि उच्च शिक्षा का विस्तार, समावेशी नीति और लैंगिक समानता के मिश्रण से भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। अगले दशक में डिजिटल शिक्षा, कौशल‑आधारित पाठ्यक्रम और अनुसंधान‑परक सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता होगी, ताकि इस वृद्धि को सतत् और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सके।