विद्यावर्धक कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग (वीवीसीई), मैसूर में दो दिवसीय फ़ैकल्टी डिवेलपमेंट प्रोग्राम (एफ़डीपी) ने नए शिक्षकों को मेंटरिंग और छात्र‑केंद्री शिक्षण विधियों से लैस करने की दिशा में पहला कदम रखा। इस कार्यक्रम का आयोजन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (आईक्यूएसी) ने किया है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता और पेशेवर नैतिकता को सुदृढ़ करना है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नए शिक्षकों के लिए मेंटरिंग और छात्र‑केंद्री शिक्षण पर दो‑दिवसीय प्रशिक्षण
  • आईक्यूएसी द्वारा गुणवत्ता‑आधारित शैक्षिक पहल
  • शिक्षण में नैतिकता, नेतृत्व और प्रभावी संवाद पर जोर

विद्यावर्धक कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग (वीवीसीई), मैसूर में आयोजित फ़ैकल्टी डिवेलपमेंट प्रोग्राम (एफ़डीपी) ने "एक महान मेंटर बनें, एक अच्छा शिक्षक बनें" शीर्षक के तहत दो दिन के सत्रों की शुरुआत की। इस पहल का लक्ष्य नव नियुक्त शिक्षकों को प्रभावी मेंटरिंग, छात्र‑केंद्रित शिक्षण पद्धतियों और पेशेवर नैतिकता के बारे में गहन ज्ञान प्रदान करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन

बी. सदाशिवे गोव्डा, प्रधानाचार्य, वीवीसीई, शॉभा शंकर, उप‑प्रधानाचार्य एवं अकादमिक डीन, तथा डिव्या सी.डी., कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग की सहयोगी प्रोफेसर, के साथ इंटर्नल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के समन्वयक ने इस कार्यक्रम को औपचारिक रूप से आरंभ किया। आरवी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के स्कूल ऑफ़ बिज़नेस के सहयोगी प्रोफेसर लोगासक्ती कंडसमि ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने मेंटरिंग के छात्रों के शैक्षणिक, पेशेवर और व्यक्तिगत विकास पर गहरा प्रभाव बताया।

मेंटरिंग बनाम शिक्षण बनाम कोचिंग

कंडसमि ने मेंटरिंग, शिक्षण और कोचिंग के बीच स्पष्ट अंतर किया। उन्होंने बताया कि मेंटर को सहानुभूति, स्पष्ट संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक फीडबैक देने की योग्यता होनी चाहिए, जबकि शिक्षक का मुख्य कार्य ज्ञान का प्रसारण है। इस विभेद को समझने से नव प्रवेशित शिक्षक अपने छात्रों के साथ अधिक गहरा, भरोसेमंद संबंध स्थापित कर सकेंगे।

इंटरैक्टिव सत्र और अभ्यास

प्रारम्भिक सत्र के बाद कई इंटरैक्टिव कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनमें प्रभावी मेंटरिंग प्रथाएँ, छात्र‑केंद्रित शिक्षण पद्धतियों, पेशेवर नैतिकता और प्रेरक शिक्षक के गुणों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों को वास्तविक जीवन के उदाहरणों और समूह चर्चाओं के माध्यम से व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर मिला, जिससे वे आलोचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और आजीवन सीखने की संस्कृति को प्रोत्साहित कर सकें।

भविष्य की दिशा

आईक्यूएसी ने इस कार्यक्रम को निरंतर चलाने का वादा किया है, जिससे शिक्षक निरंतर सीखते रहें और शैक्षणिक मानकों को ऊँचा रखें। आईक्यूएसी समन्वयकों और विभिन्न विभागों के नए नियुक्त faculty members ने सक्रिय भागीदारी दर्ज की, जो इस पहल की सफलता में एक प्रमुख कारक माना गया।