भारत की संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण स्थायी समिति 16 जुलाई को NTA और NMC की कार्यक्षमता तथा NEET परीक्षा के संचालन की समीक्षा करेगी। यह बैठक पिछले दो समितियों के बाद तीसरी बार इस विवादित मेडिकल प्रवेश परीक्षा को संबोधित करती है।
नई दिल्ली – संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण स्थायी समिति ने 16 जुलाई को एक विशेष सत्र निर्धारित किया है, जिसमें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (NMC) की कार्यप्रणाली तथा 2026 की NEET‑UG परीक्षा के संचालन की गहराई से समीक्षा की जाएगी। समिति के अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव इस सत्र का संचालन करेंगे।
पृष्ठभूमि और पूर्व बैठकें
NEET परीक्षा को 3 मई को आयोजित करने के बाद कागज़ लीक के आरोपों के कारण रद्द कर 21 जून को पुनः आयोजित किया गया। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा सुरक्षा, नियामक संस्थाओं की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। पहले दो पार्लियामेंटरी समितियों – शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल समिति तथा सरकारी आश्वासन समिति – ने इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं निकले।
समिति के एजेंडा में क्या है?
16 जुलाई के सत्र में समिति निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा करेगी:
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत नियामक संस्थाओं की संगठनात्मक संरचना, कार्यक्षेत्र और दक्षता।
- 2019 के NMC अधिनियम के तहत NEET परीक्षा का संचालन और संभावित कमियों का विश्लेषण।
- NTA को कागज़ लीक रोकने हेतु आवश्यक प्रौद्योगिकीय और प्रशासनिक उपाय।
- NEET परीक्षा में नियामक संस्थाओं को क़ानूनी शक्ति और संस्थागत स्वतंत्रता प्रदान करने की संभावना।
एक दिन पहले की सहायक बैठक
समिति ने 15 जुलाई को सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवाओं की लागत‑सुलभता एवं पहुँच को लेकर एक अलग सत्र आयोजित किया। यह दोहरी कार्यवाही यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य नीति और मेडिकल शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में व्यापक सुधार की आवश्यकता को सरकार मानती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता पर भरोसा ही मेडिकल शिक्षा के भविष्य को तय करता है। यदि नियामक संस्थाओं की कार्यक्षमता में सुधार नहीं हुआ, तो अगली पीढ़ी के डॉक्टरों की योग्यता और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की गुणवत्ता दोनों पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।
आगे के कदम और संभावित परिणाम
समिति के निष्कर्षों के आधार पर संसद में NTA को स्थायी कानूनी दर्जा देने की मांग को सुदृढ़ किया जा सकता है। साथ ही, NMC को परीक्षा संचालन में अधिक पारदर्शी प्रोटोकॉल अपनाने के लिए निर्देशित किया जा सकता है, जिससे भविष्य में कागज़ लीक जैसी घटनाओं की संभावना घटेगी। इन बदलावों से न केवल मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में विश्वास पुनः स्थापित होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता भी सुधरेगी।