नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में गर्दन की चोट से प्रशिक्षण रुकने वाले एकेडमी के पूर्व कडेट अकीरेड्डी साई वेदांश को पुने के आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (AIT) ने बी.टेक के दूसरे वर्ष में प्रवेश दिलाया। अब वह स्नातक के बाद CDS परीक्षा देकर भारतीय वायु सेना में पायलट बनने का लक्ष्य रखता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कडेट अकीरेड्डी साई वेदांश ने गर्दन की फ्रैक्चर के बाद AIT पुणे में बी.टेक की पढ़ाई फिर से शुरू की।
- AIT ने ‘ओवर एंड अबव’ सीटों के तहत विशेष अनुमति दी, जो पहली बार की पहल है।
- वेदांश CDS परीक्षा के माध्यम से भारतीय वायु सेना में पायलट बनने की तैयारी कर रहा है।
अकीरेड्डी साई वेदांश, 21 वर्ष के युवा, का एक ही सपना था – भारतीय वायु सेना में पायलट बनना। 2024 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में प्रवेश मिलने के बाद, एक साधारण प्रशिक्षण सत्र में गर्दन की हड्डी टूटने से उनका सपना अचानक बाधित हो गया। फ्रैक्चर ने उन्हें मेडिकल तौर पर असमर्थ कर दिया, जिससे उन्हें अकादमी से डिस्चार्ज किया गया।
आघात और पुनरुद्धार
मार्च 2025 में हुई इस दुर्घटना में वेदांश को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी, पर उन्हें फ़िलाडेल्फ़िया कॉलर (गर्दन ब्रेस) पहनना पड़ा, जिससे उनकी सर्वाइकल स्पाइन की हरकत सीमित हो गई। कई हफ्तों की अस्पताल में भर्ती और कठोर पुनर्वास के बाद, वे 2026 की शुरुआत में ब्रेस हटाकर धीरे‑धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटे।
AIT पुणे की अनूठी पहल
आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (AIT), पुणे, जो सवित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से संबद्ध एक इंजीनियरिंग कॉलेज है, ने इस विशेष केस को देखते हुए वेदांश को सीधे बी.टेक के दूसरे वर्ष में प्रवेश दिया। यह कदम All India Council for Technical Education (AICTE) के ‘ओवर एंड अबव’ सीटों के प्रावधान के तहत किया गया, जो वास्तविक और गंभीर मामलों के लिए आरक्षित है। AIT के निदेशक, मेजर जनरल उदय शंकर सेंगुप्ता (सेवानिवृत्त) ने कहा, “हम केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि एक सहानुभूति‑परक समुदाय हैं जो युवाओं को नई दिशा देते हैं।”
शैक्षणिक सफलता और भविष्य की योजना
ब्रेस हटने के बाद वेदांश ने दूसरे सेमेस्टर की सभी शैक्षणिक आवश्यकताएँ पूरी कीं और अब वह बी.टेक (एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन) में शीर्ष अंक प्राप्त कर रहा है। उनका लक्ष्य स्नातक के बाद कॉम्बाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा देकर सीधे भारतीय वायु सेना में पायलट बनना है। वे कहते हैं, “मैं अपनी चोट को अपनी पहचान नहीं बनने दूँगा; मैं इसे आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाऊँगा।”
समुदाय और परिवार का समर्थन
वेदांश का परिवार, विशेषकर उनके पिता, जो भारतीय सेना के अधिकारी हैं, ने इस कठिन दौर में निरंतर समर्थन दिया। AIT की इस पहल ने न केवल वेदांश को नया मौका दिया, बल्कि अन्य समान परिस्थितियों में फंसे छात्रों के लिए भी एक मिसाल स्थापित की।