UPSC सिविल सर्विसेज (प्रिलिम्स) में पंजीकरण में 1.25 लाख की गिरावट देखी गई, जबकि मेन्स में प्रविष्टि बढ़ी है। यह बदलाव उम्मीदवारों के रैशनल चयन, घटती वैकेंसी और राज्य स्तर की परीक्षाओं की आकर्षकता को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- प्रिलिम्स में 1.25 लाख की कमी, मेन्स में लगातार वृद्धि
- वैकेंसी में उतार-चढ़ाव ने उम्मीदवारों को विकल्पों की ओर धकेला
- राज्य सार्वजनिक सेवा आयोगों की विश्वसनीयता बढ़ी, जिससे विविधीकरण हुआ
उम्मीदवारों की संख्या में बदलाव को समझने के लिए UPSC की 74वीं वार्षिक रिपोर्ट (2023‑24) का विश्लेषण आवश्यक है। इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रिलिम्स में भाग लेने वाले कुल उम्मीदवार 10,27,514 तक गिर गए, जबकि 2022‑23 में यह 11,52,566 था। इस गिरावट लगभग 1.25 लाख अभ्यर्थियों की कमी दर्शाती है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे कम है।
मेन्स में बढ़ती भागीदारी
दूसरी ओर, सिविल सर्विसेज मेन्स परीक्षा में प्रविष्टि लगातार बढ़ी है—2021‑22 में 9,156 से लेकर 2023‑24 में 14,579 तक पहुंची। यह वृद्धि संकेत देती है कि उम्मीदवार केवल तैयार होने पर ही प्रिलिम्स में नहीं, बल्कि मेन्स में भी प्रयत्न कर रहे हैं, जिससे उनका चयन अधिक रणनीतिक हो रहा है।
वैकेंसी की मौलिक भूमिका
2014 में 1,363 वैकेंसी के शिखर से लेकर 2021 में 748 तक गिरावट ने कई अभ्यर्थियों को वैकल्पिक मार्ग तलाशने पर मजबूर किया। वैकेंसी में अस्थिरता ने न केवल प्रिलिम्स की आकर्षकता घटाई, बल्कि राज्य स्तर के सार्वजनिक सेवा आयोगों (जैसे बीपीएससी, यूपीपीएससी) को अधिक विश्वसनीय विकल्प बना दिया।
विविधीकरण के कारण
बिहार के एक छात्र, आदित्य भार्गव, ने बताया कि यदि सिविल सर्विसेज कार्य नहीं करती, तो वह सार्वजनिक नीति, थिंक‑टैंक, और शैक्षणिक क्षेत्र में करियर की ओर देखेंगे। इसी तरह, कई अभ्यर्थी CGS, CMS, ESE और CAPF जैसी परीक्षाओं को भी अपना विकल्प बना रहे हैं। यह प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि आज के युवा केवल UPSC को ही नहीं, बल्कि व्यापक सरकारी और तकनीकी सेवाओं को भी लक्ष्य बना रहे हैं।
भविष्य की सम्भावनाएँ
यदि वैकेंसी स्थिर रहती है और राज्य आयोगों की विश्वसनीयता बढ़ती है, तो यह रुझान जारी रह सकता है। इससे UPSC के लिए प्रतिस्पर्धा में परिवर्तन, परीक्षा संरचना में पुनरावलोकन और उम्मीदवारों के लिए अधिक बहु‑मार्गीय करियर विकल्प उत्पन्न हो सकते हैं।