नई दिल्ली में यू.ओ.एम. अमित शाह ने जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय के उद्घाटन के दौरान कहा कि किसी देश का भविष्य उसकी पुस्तकालयों की भीड़ और युवा पाठकों से मापा जा सकता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • युवा पाठक राष्ट्र के भविष्य का सूचक हैं।
  • पुस्तकालय शिक्षा और ज्ञान का आधार हैं।
  • सरकार ने पुस्तकालय को स्कूलों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

नई दिल्ली के नगर निगम क्षेत्र में स्थित जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन आज सुबह हुआ, जहाँ यू.ओ.एम. अमित शाह ने बताया कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों की भीड़ और युवा पाठकों की संख्या से मापा जा सकता है।

पुस्तकालय का महत्व और आंकड़े

पुस्तकालय में लगभग 32,000 पुस्तकों के साथ-साथ 1 करोड़ ई‑बुक्स की पहुँच उपलब्ध है, जिससे यह शैक्षणिक संसाधनों का एक विशाल भंडार बन गया है। शाह ने कहा कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता ही राष्ट्र निर्माण की नींव हैं और पुस्तकालय इसी ज्ञान को पोषित करते हैं।

शिक्षा नीति और युवाओं पर प्रभाव

अमित शाह ने पुस्तकालय प्रशासन से अनुरोध किया कि वे आस-पास के दस विधानसभा क्षेत्रों के सभी स्कूलों से संपर्क करके युवा पाठकों को पुस्तकालय से परिचित कराएँ। उनका मानना है कि पढ़ने की आदत विकसित होने पर युवा स्वयं सही और गलत में अंतर कर सकते हैं, जिससे समाज का विकास सम्भव है।

जयप्रकाश नारायण की विरासत और पुस्तकालय का नामकरण

शाह ने पुस्तकालय को ‘जयप्रकाश नारायण’ नाम देने के निर्णय की सराहना की, जो एक ऐसे नेता थे जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में साहस दिखाया और विभिन्न विचारधाराओं में उत्कृष्टता की कोशिश की। यह नाम युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने के साथ-साथ ऐतिहासिक स्मृति को भी जीवित रखता है।

भविष्य की योजनाएँ

अमित शाह ने दिल्ली सरकार से अनुरोध किया कि वह शहर के सभी पुस्तकालयों को एकीकृत कर स्कूलों के साथ जोड़ें, ताकि पुस्तकालय एक शैक्षणिक केंद्र बन सकें। दिल्ली की सरकार ने पहले ही इसी दिशा में कदम बढ़ाए हैं, और यह पहल छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयुक्त अध्ययन वातावरण प्रदान करेगी।