SRM Executive Education ने 35 प्रमुख उद्योग नेताओं को एकत्रित कर वित्त‑टेक, ऑटो, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा आदि क्षेत्रों में भविष्य‑उन्मुख कार्यकारी शिक्षा कार्यक्रमों पर चर्चा की। यह पहल संस्थागत प्राथमिकताओं के साथ संरेखित नई पाठ्यक्रमों के निर्माण को लक्ष्य बनाती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 35 उद्योग नेताओं ने राउंड टेबल में भाग लिया
  • भविष्य‑उन्मुख कार्यकारी शिक्षा कार्यक्रमों की योजना बनायी गई
  • सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के साथ सहयोग में नया पीजी प्रोग्राम लॉन्च होगा

SRM Executive Education, जो SRM Institute of Science and Technology (SRMIST) की एक प्रमुख पहल है, ने अपना पहला उद्योग‑अकादमी गोलमेज आयोजित किया। यह कार्यक्रम 14 जुलाई 2026 को चेन्नई में हुआ, जहाँ फिनटेक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, ऑटोमोबाइल, अस्पताल, हेल्थकेयर, कंसल्टिंग, बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, एआई, मानव संसाधन और उत्पाद प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों के 35 उद्योग नेता शामिल हुए।

पृष्ठभूमि

भारत में कार्यकारी शिक्षा का परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, क्योंकि कंपनियां नई तकनीकों और डिजिटल परिवर्तन के साथ तालमेल बिठाने के लिए तत्पर हैं। इस संदर्भ में, SRM Executive Education ने academia‑industry सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए इस गोलमेज को मंच प्रदान किया। इस पहल का उद्देश्य न केवल मौजूदा पाठ्यक्रमों को अद्यतन करना, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पूरी तरह से नया प्रोग्राम बनाना है।

राउंड टेबल की मुख्य चर्चा

सत्र में प्रतिभागियों ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श किया: (i) कार्यकारी शिक्षा को संगठनात्मक प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करना, (ii) भविष्य‑उन्मुख कौशल जैसे एआई, साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना, और (iii) लर्निंग‑एंड‑डिवेलपमेंट (L&D) मॉडलों को लचीला बनाकर ऑनलाइन‑ऑफ़लाइन मिश्रित शिक्षा प्रदान करना। कई नेताओं ने बताया कि वर्तमान में उनके कर्मचारियों को ऐसे कौशलों की कमी है, जो नई डिजिटल रणनीतियों को लागू करने में बाधा बनती है।

आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा

SRM Executive Education के CEO, एम. बालाजी ने घोषणा की कि संस्थान राष्ट्रीय विश्वविद्यालय ऑफ सिंगापुर (NUS) के साथ सहयोग में एक‑साल का पूर्णकालिक रेज़िडेंशियल पीजी प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (PGPM) और कार्यकारी पोस्ट‑ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (PGDM) लॉन्च करेगा। इसके अतिरिक्त, छोटे‑समय के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, कार्यशालाएँ और इंटर्नशिप‑आधारित मॉड्यूल भी तैयार किए जा रहे हैं, जो उद्योग की तत्काल जरूरतों को पूरा करेंगे।

भविष्य की संभावनाएँ

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सहयोगी मंच न केवल प्रतिभागी संस्थानों को प्रतिस्पर्धी लाभ देंगे, बल्कि भारतीय कार्यकारी शिक्षा को वैश्विक मानकों के साथ जोड़ेंगे। यदि SRM की योजनाएँ सफल रहती हैं, तो यह मॉडल अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक मानक बन सकता है, जिससे भारत में उच्च शिक्षा के परिदृश्य में एक नई लहर आएगी।