तेलंगाना सरकार ने 80,000 अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए एआई और डिजिटल सुरक्षा पर निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल राज्य के 205 अल्पसंख्यक आवासीय स्कूलों में अगस्त से लागू होगी और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से वित्त पोषित होगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 80,000 अल्पसंख्यक छात्रों को मुफ्त एआई एवं डिजिटल सुरक्षा शिक्षा
- TMREIS के 205 स्कूलों में अगस्त 15 से प्रारंभ
- CSR‑आधारित साझेदारी द्वारा वित्त पोषण
तेलंगाना में शिक्षा और प्रौद्योगिकी के संगम को मजबूत करने के उद्देश्य से, राज्य सरकार ने ‘AI Readiness and Digital Safety Programme’ लॉन्च किया है। यह पहल तेलंगाना अल्पसंख्यक आवासीय शैक्षणिक संस्थान समाज (TMREIS) के तहत चल रहे 205 स्कूलों में 80,000 छात्रों को लक्ष्य बनाती है, जिससे वे न केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बुनियादी समझ प्राप्त करेंगे, बल्कि डिजिटल सुरक्षा के महत्व को भी सीखेंगे।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
भारत में अल्पसंख्यक समुदायों की शैक्षणिक स्थिति में असमानता एक सतत चुनौती रही है। विशेषकर डिजिटल कौशल के क्षेत्र में, इन छात्रों को अक्सर तकनीकी क्रांति के तेज़ी से आगे रहने का अवसर नहीं मिलता। तेलंगाना के माइनॉरिटीज़ वेलफ़ेयर मंत्री मोहम्मद आज़रुद्दीन ने कहा, “हमारा मिशन है कि कोई भी प्रतिभा पीछे न रहे। स्कूल स्तर पर एआई और डिजिटल साक्षरता को स्थापित करके, हम अपनी युवा पीढ़ी को तकनीकी परिवर्तन के अग्रणी बनने के लिए तैयार कर रहे हैं।” यह बयान राज्य के मुख्य मंत्री ए. रेवंत रेड्डी के व्यापक डिजिटल विजन के साथ संरेखित है, जिसमें हर छात्र को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करना शामिल है।
कार्यक्रम की संरचना
यह प्रशिक्षण Doxa Consulting Private Limited (DCPL) और MASK NextGen Inc. के सहयोग से तैयार किया गया है। MASK NextGen द्वारा विकसित पाठ्यक्रम में 24 इंटरैक्टिव मॉड्यूल और तीन मूल्यांकन शामिल हैं, जो एक गैमिफ़ाइड, स्व-गति वाले डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है। इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से छात्र एआई के मूल सिद्धांत, डेटा सुरक्षा, ऑनलाइन नैतिकता, साथ ही अंग्रेज़ी संवाद, नेतृत्व कौशल और लैंगिक समानता, विविधता एवं समावेशन (DEI) की भावना को भी सीखेंगे।
वित्तीय मॉडल और CSR साझेदारी
प्रोग्राम को राज्य की बजट से कोई खर्च नहीं किया गया। इसके बजाय, यह एक CSR‑आधारित साझेदारी के तहत फंडेड है, जहाँ निजी कंपनियों ने सामाजिक उत्तरदायित्व के हिस्से के रूप में इस पहल को समर्थन दिया है। इस मॉडल ने न केवल वित्तीय बोझ को कम किया, बल्कि निजी‑सार्वजनिक सहयोग की एक नई मिसाल भी स्थापित की है, जो भविष्य में समान पहलों के लिए टेम्पलेट बन सकती है।
भविष्य की संभावनाएँ
जबकि 80,000 छात्रों का प्रारंभिक लक्ष्य उल्लेखनीय है, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों को विस्तार देकर पूरे राज्य में डिजिटल असमानता को दूर किया जा सकता है। यदि सफल रहा, तो यह मॉडल अन्य राज्यों में भी दोहराया जा सकता है, जिससे भारत में अल्पसंख्यक वर्गों के लिए डिजिटल समावेशी शिक्षा का नया युग शुरू हो सकता है।
संक्षेप में, तेलंगाना का यह पहल न केवल छात्रों को तकनीकी कौशल प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक समावेश और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम भी है।