सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई के सर्कुलर में अंग्रेज़ी को ‘गैर‑देशी’ कहने को चुनौती दी और ‘देशी’ शब्द की परिभाषा पर सवाल उठाए। यह मुद्दा तीन‑भाषा योजना और संविधान के भाषा लक्ष्य को पुनः विचार करने की जरूरत को उजागर करता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सीबीएसई ने अंग्रेज़ी को ‘गैर‑देशी’ कहा, जिससे कानूनी चुनौती आई।
  • सुप्रीम कोर्ट ने ‘देशी’ शब्द की व्याख्या पर संवैधानिक प्रश्न उठाए।
  • तीन‑भाषा योजना को लागू करने में शिक्षकों की कमी प्रमुख बाधा बन रही है।

नई दिल्ली (१४ जुलाई २०२६) – भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को सीबीएसई द्वारा जारी सर्कुलर में अंग्रेज़ी को ‘गैर‑देशी भाषा’ के रूप में वर्गीकृत करने पर सवाल उठाए। न्यायालय के तीन‑जज बेंच के सदस्य जॉयमाल्य बागची न्यायाधीश ने विशेष रूप से पूछा, “क्या भारत अंग्रेज़ी को मूलभूत भारतीय भाषा मान सकता है?” यह प्रश्न भारतीय भाषा नीतियों के ऐतिहासिक और संवैधानिक पहलुओं को फिर से सामने लाया है।

पृष्ठभूमि और संवैधानिक संदर्भ

भारत के संविधान में ‘देशी भाषा’ शब्द नहीं बल्कि ‘मातृभाषा’, ‘क्षेत्रीय भाषा’ या ‘भारतीय भाषा’ जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं। ब्रिटिश राज के दौरान अंग्रेज़ी को शासकीय भाषा के रूप में लागू किया गया था, और आज भी कई राज्यों में आधिकारिक कार्यों में इसका उपयोग होता है। इस कारण से, ‘देशी’ शब्द को कॉलोनियल लोडेड माना जाता है, जैसा कि न्यायालय ने कहा।

तीन‑भाषा योजना का विवाद

सीबीएसई के नवीनतम सर्कुलर (१० जुलाई) में कक्षा 9 के छात्रों को कम से कम दो ‘देशी’ भाषाएँ पढ़ने की अनिवार्यता रखी गई है। यह योजना ने कई अभिभावकों और शैक्षणिक प्रतिनिधियों को चिंता में डाल दिया, क्योंकि २२ अनुसूचित भाषाओं में से केवल तीन के लिए ही पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सभी २२ भाषाओं के लिए शिक्षक उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

शिक्षक अभाव और समाधान

सीबीएसई ने १३ जुलाई को एक अफ़िडेविट में बताया कि शिक्षक की कमी को पूरा करने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षक और योग्य स्नातकोत्तर छात्रों को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जा सकता है। बोर्ड ने कहा कि २८,८४८ स्कूलों में से ४७.३ % पहले ही दो या अधिक भारतीय भाषाएँ पढ़ा रहे हैं, और ९९.९ % स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा का शिक्षक उपलब्ध है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने भी २२ अनुसूचित भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों की तैयारी पूरी कर ली है, जिससे योजना को कार्यान्वित करने की संभावनाएँ बढ़ी हैं।

भविष्य की दिशा

न्यायालय ने अगले सुनवाई की तिथि २२ जुलाई निर्धारित की है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि तीन‑भाषा योजना को कैसे संशोधित किया जाएगा। यदि अंग्रेज़ी को ‘देशी’ मानने की दिशा में बदलाव किया जाता है, तो यह भारत की बहुभाषी पहचान और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी‑२०२० के लक्ष्य दोनों को प्रभावित कर सकता है।