विक्रम सिमहापुरी विश्वविद्यालय (वीएसयू) के अनुबंध लेक्चररों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे राज्य सरकार को न्यूनतम समय सीमा (MTS) लागू करने और मौजूदा अनुबंध पदों को नियमित करने का आग्रह किया गया है। एएसपीएसए के अध्यक्ष बी. वेंकट सुब्बा रेड्डी ने तुरंत कार्रवाई का अनुरोध किया, जबकि पूरे आंध्र प्रदेश में 3,000 से अधिक अनुबंध शिक्षक समान मांग कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- वीएसयू कैंपस में अनुबंध शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की
- न्यूनतम समय सीमा (MTS) के त्वरित कार्यान्वयन की मांग
- नियमितीकरण के बाद ही नई नियुक्तियों की अपील
- आंध्र प्रदेश में 3,000+ अनुबंध शिक्षक समान मांग कर रहे हैं
हड़ताल की पृष्ठभूमि
नल्लोर के काकातुर में स्थित विक्रम सिमहापुरी विश्वविद्यालय (वीएसयू) के अनुबंध सहायक प्रोफेसरों ने एएसपीएसए के मंचन पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान किया। छात्र और प्रशासन दोनों ही इस स्थिति से प्रभावित हैं, क्योंकि अनुबंध शिक्षक कई विभागों में प्रमुख शिक्षण भार संभालते हैं।
संघ के अध्यक्ष का बयान
संघ के अध्यक्ष बी. वेंकट सुब्बा रेड्डी ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रबंधन से तुरंत MTS लागू करने और मौजूदा अनुबंध शिक्षकों को नियमित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हमारी सेवा के कई साल हो चुके हैं, अब हमें स्थायी पदों का हक़ चाहिए।”
मुख्य मांगें
रेड्डी ने स्पष्ट किया कि पहले सभी वर्तमान अनुबंध शिक्षकों को नियमित किया जाए, फिर शेष रिक्तियों के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही, उन्होंने अनुरोध किया कि अनुबंध सहायक प्रोफेसरों को एसोसिएट प्रोफेसर पदों की पूर्ति में प्राथमिकता दी जाए।
राज्य‑व्यापी संदर्भ
यह केवल वीएसयू तक सीमित नहीं है; आंध्र प्रदेश के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों में 3,000 से अधिक अनुबंध शिक्षकों ने समान मांगें रखी हैं। पिछले वर्षों में कई बार अनुबंध प्रावधानों को लेकर प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं मिल पाया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश में अनुबंध शिक्षकों की स्थिति 1990 के दशक से ही अस्थिर रही है। 2005 में लागू किए गए न्यूनतम समय सीमा (MTS) नियम ने कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान की, परन्तु कई विश्वविद्यालयों ने इसे लागू नहीं किया, जिससे असंतोष बढ़ता गया। पिछले दो दशकों में कई बार छात्र संघ और शिक्षक संघ ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर दवाब बनाया है, लेकिन सरकार का जवाब अक्सर टालमटोल के रूप में रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that prolonged reliance on contract faculty undermines academic continuity and research output, potentially affecting the global ranking of Andhra Pradesh’s higher‑education institutions.
“Regularisation of contract staff is not just a labor issue; it directly impacts the quality of education delivered to millions of students.” – Dr. Ananya Rao, Higher Education Policy Analyst
Frequently Asked Questions
Q1: न्यूनतम समय सीमा (MTS) क्या है?
A1: MTS वह न्यूनतम सेवा अवधि है जिसके बाद एक अनुबंध शिक्षक को नियमित पद मिलने की प्राथमिकता मिलती है।
Q2: आंध्र प्रदेश में कुल कितने अनुबंध शिक्षक प्रभावित हैं?
A2: अनुमानित 3,000 से अधिक अनुबंध शिक्षक राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में इस उपाय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।