तिरुपुर के इडुवम्पालयम सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय के 10 छात्रों ने NEET परीक्षा उत्तीर्ण कर सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। समाजसेवियों के सहयोग से इस स्कूल ने अभावों से निकलकर चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश पाने का सपना सच कर दिखाया है।

मुख्य बातें

  • इडुवम्पालयम सरकारी स्कूल के 10 छात्रों ने NEET 2026 पास किया।
  • प्रत्येक सफल छात्र को ₹25,000 का नकद पुरस्कार दिया गया।
  • VETRY NGO और स्थानीय उद्योगपतियों के सहयोग से स्कूल का कायाकल्प हुआ।
  • छात्रों को भविष्य के लिए स्टेथोस्कोप भी भेंट किए गए।

तमिलनाडु के तिरुपुर जिले के इडुवम्पालयम सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए सोमवार का दिन गौरवशाली रहा। स्कूल के 10 छात्रों ने अत्यंत कठिन NEET 2026 परीक्षा उत्तीर्ण कर यह साबित कर दिया कि यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्र भी आसमान छू सकते हैं। इन छात्रों में से दो ने अपने पहले प्रयास में सफलता प्राप्त की, जबकि आठ अन्य ने निरंतर प्रयास से यह मुकाम हासिल किया।

कायाकल्प की कहानी: अभाव से उत्कृष्टता तक

यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। पिछले दो दशकों में, यह स्कूल बुनियादी ढांचे और स्टाफ की कमी से जूझने वाले संस्थान से बदलकर एक उच्च-प्रदर्शन करने वाले केंद्र के रूप में उभरा है। VETRY NGO और Ramaraj CottonChennai Silks जैसे सफल उद्योगों के सहयोग ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

2007 में जब NGO ने इस स्कूल को गोद लिया था, तब यहाँ केवल 450 छात्र थे। ₹2.5 करोड़ की लागत से 24 आधुनिक कक्षाओं और बेहतर सुविधाओं वाले भवन का निर्माण किया गया। पिछले 19 वर्षों से, NGO हर महीने ₹1 लाख का योगदान दे रहा है ताकि शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके और 3,600 छात्रों तक शिक्षा का लाभ पहुँचाया जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि कैसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP Model) सरकारी शिक्षा प्रणाली की कमियों को दूर कर सकती है। जब स्थानीय उद्योग और गैर-लाभकारी संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए भी चिकित्सा जैसे प्रतिष्ठित करियर के द्वार खुल जाते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का यह मॉडल देश के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए एक मिसाल है।

पुरस्कार समारोह के दौरान, तिरुपुर शहर की पुलिस कमिश्नर S. राजेशवरी और मुख्य शिक्षा अधिकारी पुनिता अन्थोनीअम्माल उपस्थित थीं। प्रत्येक छात्र को ₹25,000 की नकद राशि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, परोपकारी स्वामियप्पन ने छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से स्टेथोस्कोप भेंट किए, जिससे छात्रों और उनके माता-पिता के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।

क्या आप जानते हैं?: तिरुपुर के इस स्कूल का विकास केवल आर्थिक मदद से नहीं, बल्कि एक समर्पित NGO द्वारा 19 वर्षों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. छात्रों को कितना पुरस्कार दिया गया?
प्रत्येक सफल छात्र को ₹25,000 का नकद पुरस्कार दिया गया।

2. स्कूल के विकास में किसका मुख्य योगदान रहा?
VETRY NGO और तिरुपुर के स्थानीय उद्योगों का इस स्कूल के विकास में सबसे बड़ा योगदान रहा है।