झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो सहित पांच अभ्यर्थियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। छात्र सरकार से लिखित आश्वासन और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • JPSC और JSSC परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन तेज।
  • देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में 5 छात्रों ने शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल।
  • छात्रों की मांग: 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द हो और CBI जांच हो।
  • आंदोलनकारियों ने सरकार से लिखित आश्वासन की मांग की है।

झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों ने राज्य में एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले लिया है। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और चार अन्य अभ्यर्थियों ने एक स्टेडियम-आधारित विरोध शिविर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

भूख हड़ताल पर बैठे प्रमुख आंदोलनकारी

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पांच चेहरे राज्य के युवाओं की पीड़ा और संघर्ष को दर्शाते हैं:

  • देवेंद्र नाथ महतो (छात्र नेता): इन्होंने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।
  • राहुल क्रांति कुमार (40): पिछले 20 वर्षों से तैयारी कर रहे राहुल ने बताया कि 172 अंक प्राप्त करने के बावजूद उन्हें सिस्टम की खामियों के कारण बाहर कर दिया गया।
  • हबीबा (रांची): एक लंबे समय से JPSC की तैयारी कर रही हबीबा ने कहा कि 10 दिनों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद भी सरकार की चुप्पी ने उन्हें भूख हड़ताल के लिए मजबूर किया।
  • रूपेश (JPSC उम्मीदवार): रूपेश का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने हजारों छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया है।
  • सविता कुमारी (JPSC उम्मीदवार): सविता सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हुए तैयारी कर रही महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनका सपना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल कुछ छात्रों का विरोध नहीं है, बल्कि यह झारखंड की पूरी भर्ती प्रणाली पर उठते गंभीर सवालों का प्रतीक है। यदि पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई, तो राज्य से प्रतिभा का पलायन और बढ़ता असंतोष सामाजिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।

भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी न केवल छात्रों का भविष्य बर्बाद करती है, बल्कि शासन के प्रति जनता के विश्वास को भी खत्म कर देती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और पेपर लीक के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इससे पहले भी कई बार छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा है, जिससे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।

क्या आप जानते हैं?: झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा दर इतनी अधिक है कि लाखों अभ्यर्थी कुछ हजार पदों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. छात्र मुख्य रूप से क्या मांग कर रहे हैं?
छात्र 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के रद्द होने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए सरकार से लिखित आश्वासन मांग रहे हैं।

2. क्या यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से जुड़ा है?
नहीं, प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि दोषपूर्ण भर्ती प्रणाली के खिलाफ है।