सूरत के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पीजी छात्र की आत्महत्या के बाद चार वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों में से दो ने पुलिस में बयान दिया। शेष दो डॉक्टरों को शनिवार को हाज़िर होने की उम्मीद है। मामले में गलत गिरफ्तारी और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे हैं।

मुख्य बिंदु

  • डॉक्टरों ने पुलिस में बयान दिया और घर लौटने की अनुमति मिली
  • शेष दो डॉक्टरों को शनिवार को हाज़िर होने की उम्मीद
  • आत्महत्या की जांच में रेजिंग के आरोप प्रमुख

सूरत के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में दो वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर, डॉ. अनुज माहेश्वरी और डॉ. दिसिता गेवरीया, ने 9 अगस्त को छात्र डॉ. हर्ष पंड्या की आत्महत्या के संबंध में पुलिस के सामने अपना बयान दिया। पुलिस ने उनके बयान दर्ज किए और उन्हें घर जाने की अनुमति दी।

पुलिस ने बताया कि शेष दो वरिष्ठ डॉक्टर, डॉ. निराली वासावे और डॉ. हिनाबेन भूट, शनिवार को जांच के लिए हाज़िर होंगे। इन चार डॉक्टरों पर गलत बंदी बनाना और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

डॉ. पंड्या, 29 वर्ष, को उनके हॉस्टल कमरे में मृत पाया गया जब उनके सहपाठी ने उन्हें नहीं देखा तो खोज में आए। कॉलेज के डीन, डॉ. जयेश ब्रह्मभट्ट ने एंटी-रैगिंग समिति की रिपोर्ट के आधार पर चार डॉक्टरों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that such incidents highlight systemic issues of harassment in Indian medical institutions, prompting urgent reforms to safeguard student welfare and enforce stricter anti‑ragging policies.

"रैगिंग की रोकथाम के लिए सख्त नीतियों और त्वरित न्यायिक कार्रवाई आवश्यक है," कहते हैं छात्र कल्याण विशेषज्ञ डॉ. रितु शर्मा।
Did You Know?: भारत में रैगिंग से जुड़ी छात्र आत्महत्याएं 2010 से लगातार बढ़ रही हैं, जिससे कई राज्यों ने कड़े नियम लागू किए हैं।

Frequently Asked Questions

  • प्रश्न: क्या सभी चार डॉक्टरों को अभी तक गिरफ्तार किया गया है?
    उत्तर: नहीं, दो डॉक्टरों ने बयान दिया है और उन्हें घर जाने की अनुमति मिली है; शेष दो को शनिवार को हाज़िर होने के लिए बुलाया गया है।
  • प्रश्न: इस मामले में कौन से कानूनी सेक्शन लागू हुए हैं?
    उत्तर: बीएनएस सेक्शन 127(2), 352 और 54 के तहत डॉक्टरों को आरोपित किया गया है।