‘जना नायकन’ को सेंसर बोर्ड ने अंततः ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया, जिससे कई महीनों की अनिश्चितता समाप्त हुई। यह फिल्म 24 साल बाद विजय की दूसरी ए‑रेटेड फिल्म है, पहले 2002 की ‘बाघवती’ को ए सर्टिफिकेट मिला था।

टैमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय की नई फिल्म जना नायकन को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) ने अब ‘ए’ सर्टिफिकेट प्रदान कर दिया है। यह प्रमाणपत्र फिल्म को 18 वर्ष से ऊपर के दर्शकों तक सीमित करता है, और इस निर्णय ने कई हफ्तों तक चल रहे सेंसर विवाद को अंत तक पहुँचाया।

पिछला इतिहास: बाघवती (2002)

विजय की पहली ए‑रेटेड फिल्म 2002 में रिलीज़ हुई बाघवती थी, जिसका निर्देशन ए. वेंकटेश ने किया था। उस समय फिल्म को अत्यधिक एक्शन, रक्त‑स्राव और हिंसा के कारण ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला था। वेंकटेश ने बाद में बताया कि “जब नायक किसी को मारता है और खून बहता है, तो सेंसर बोर्ड पहले बहुत कड़ा रहता था”।

जना नायकन की प्रमाणन प्रक्रिया

‘जना नायकन’ को 183 मिनट की लंबाई वाला बताया गया है और यह एच. विनोथ द्वारा निर्देशित है। फिल्म के रिलीज़ की तिथि 24 जुलाई तय है, लेकिन कई महीनों तक चलने वाले सेंसर देरी ने दर्शकों के बीच अटकलें पैदा कर दी थीं। अब ‘ए’ सर्टिफिकेट मिलने के बाद, फिल्म को बिना किसी प्रतिबंध के थिएटर में दिखाया जा सकेगा।

सेंसर बोर्ड में बदलाव की संकेत

डायरेक्टर ए. वेंकटेश ने अपने पुराने इंटरव्यू में कहा था कि आजकल सेंसर बोर्ड अधिक उदार हो गया है, जबकि 2000 के दशक में यह बहुत सख्त था। यह बदलाव भारतीय सिनेमा में कंटेंट की विविधता को बढ़ावा दे रहा है, खासकर एक्शन‑ड्रामा और थ्रिलर शैली में।

विजय के करियर में ‘ए’ सर्टिफिकेट का महत्व

विजय ने अपने करियर में अधिकांश फिल्में ‘U’ या ‘U/A’ सर्टिफिकेट के तहत रिलीज़ की हैं, जिससे वह सभी आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित कर सके। ‘बाघवती’ के बाद अब ‘जना नायकन’ के साथ वह केवल दो ही ए‑रेटेड फ़िल्मों में से दूसरी बन गया है, जिससे इस सर्टिफिकेट की विशिष्टता और भी स्पष्ट होती है।

भविष्य में इस प्रकार के सर्टिफिकेट वाले प्रोजेक्ट्स के लिए दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स‑ऑफ़िस प्रदर्शन यह तय करेगा कि निर्माता और निर्देशक अधिक जोखिम भरे कंटेंट पर कितना भरोसा करेंगे।