प्रसिद्ध Playback गायका एस. जनकी का 11 जुलाई को मैसुरु में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 18 भाषाओं में रिकॉर्ड किए गए उनके गीत भारतीय संगीत की विविधता का प्रतीक थे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • एस. जनकी का निधन 11 जुलाई को मैसुरु में हुआ।
  • उन्होंने 18 भाषाओं में कुल 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए।
  • उनकी बहुमुखी आवाज़ ने क्लासिकल से लेकर बाल गीतों तक सभी शैलियों को छुआ।

एस. जनकी, जिन्हें अक्सर "जनकी-आमा" कहा जाता था, भारतीय फिल्म संगीत की सबसे प्रिय आवाज़ों में से एक थीं। 1938 में जन्मी वह 1940 के दशक में अपने पिता के संगीत विद्यालय में प्रशिक्षण लेकर संगीत जगत में कदम रखी।

विविध भाषा कौशल और संगीत यात्रा

जनकी ने अपने करियर में कन्नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम, हिन्दी, बांग्ला, मराठी, ओड़िया सहित 18 विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाए। उनका बहु-भाषी पोर्टफ़ोलियो न केवल भाषाई विविधता को दर्शाता है, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग की राष्ट्रीय एकता की साक्षी भी है।

शैली में बहुमुखी प्रतिभा

क्लासिकल रागों से लेकर रोमांटिक धुनों, लोकगीतों, भजन और बच्चों के स्वर तक, जनकी ने हर शैली में अपनी अनूठी छाप छोड़ी। उनके गाने जैसे "एलेन वॉडियो" (तेलुगु) और "ओम शान्ति" (हिन्दी) आज भी नई पीढ़ी के श्रोताओं को आकर्षित करते हैं।

विरासत और सम्मान

उनके निधन के बाद, कई राज्य सरकारों और सांस्कृतिक संस्थानों ने शोक व्यक्त किया। कई पुरस्कार और मान्यताएँ, जिनमें पद्म भूषण शामिल था, को उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया, परन्तु उनका योगदान अनदेखा नहीं किया जा सकता। संगीतकार और समकालीन कलाकार अक्सर कहते हैं कि उनका संगीत “हर राज्य की धड़कन” है।

भविष्य की दिशा

जनकी के रिकॉर्डिंग स्टूडियो में अभिलेखों का संरक्षण और डिजिटल रूपांतरण अब प्रमुख चर्चा बन गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि उनकी आवाज़ आने वाली पीढ़ियों के लिए सुलभ रहे और भारतीय संगीत इतिहास में उनका स्थान हमेशा के लिए सुरक्षित रहे।