टेलीविज़न रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सज़ा’ में अभिनेत्री आकांक्षा चमोला ने गौरव खन्ना से तलाक की योजना का खुलासा किया। तलाक के बाद घर खरीदने की चुनौतियों और सामाजिक प्रतिबंधों पर भी उन्होंने अपने विचार साझा किए। राम कपूर ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की, जिससे चर्चा और तीव्र हो गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अकांक्षा चमोला ने तलाक की योजना ‘लॉक अप’ में उजागर की
- तलाक के बाद घर खरीदने में सामाजिक और आर्थिक टेंशन
- राम कपूर ने महिलाओं के किराए के अधिकारों पर प्रकाश डाला
नई दिल्ली – 15 जुलाई 2026 को प्रसारित हुए लोकप्रिय रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सज़ा’ में टीवी एक्ट्रेस अकांक्षा चमोला ने एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह और उनके पति, अभिनेता गौरव खन्ना, तलाक की प्रक्रिया में हैं और लगभग एक साल से अलग रह रहे हैं। यह खुलासा दर्शकों में तेज़ी से चर्चा का कारण बना।
तलाक के बाद घर‑खरीद की टेंशन
अकांक्षा ने बताया कि तलाक की प्रक्रिया के साथ ही एक नई समस्या उभरी – घर खरीदने की टेंशन। वह मानती हैं कि तलाकशुदा या सिंगल महिलाओं को कई हाउसिंग सोसायटियों में किराए या खरीद के अधिकार नहीं मिलते, जिससे उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “‘लॉक अप’ के बाद मेरी परेशानियाँ यहीं से शुरू हुई हैं।”
राम कपूर की टिप्पणी और सामाजिक संदर्भ
शो के दौरान राम कपूर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि “गौरव एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन मैं व्यक्तिगत सलाह नहीं दूँगा” और साथ ही भारत में महिलाओं के किराए से संबंधित प्रतिबंधों को उजागर किया। उनका यह बयान सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि यह कई महिलाओं की वास्तविक समस्याओं को दर्शाता है।
अकांक्षा का दृढ़ रुख
अकांक्षा ने स्पष्ट किया कि वह गौरव से शादी के बारे में कोई सलाह नहीं लेगी और अपने भविष्य को खुद तय करने का इरादा रखती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एक “कॉन्फिडेंट और सिक्योर पार्टनर” की आवश्यकता है, जो उनके व्यक्तित्व को समझे और समर्थन करे। यह बयान उनकी व्यक्तिगत शक्ति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि तलाक की प्रक्रिया पूरी होती है, तो दोनों कलाकारों के करियर और व्यक्तिगत जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, इस खुलासे ने भारतीय मनोरंजन उद्योग में महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक मान्यताओं पर नई बहस को जन्म दिया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खुली बातचीत से भविष्य में अधिक पारदर्शिता और समर्थन की आशा की जा सकती है।