फिल्म 'दिल चाहता है' की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने अपने शुरुआती दिनों के डर और फिल्म के सेट पर मिले शानदार अनुभव को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे ज़ोया अख्तर ने उन्हें इस ऐतिहासिक फिल्म का हिस्सा बनाया।

मुख्य बातें

  • 'दिल चाहता है' के रिलीज को 25 वर्ष पूरे हो गए हैं।
  • सोनाली कुलकर्णी ने फिल्म के सेट पर फैशन और लग्जरी को लेकर अपनी शुरुआती घबराहट साझा की।
  • ज़ोया अख्तर ने कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में सोनाली को इस फिल्म के लिए चुना था।
  • फिल्म के सेट पर अनुशासन और प्रोफेशनलिज्म का एक नया स्तर देखने को मिला था।

बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक फिल्म 'दिल चाहता है' आज अपनी रिलीज की 25वीं वर्षगांठ मना रही है। इस खास मौके पर, फिल्म में 'पूजा' का यादगार किरदार निभाने वाली अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने फिल्म के सेट से जुड़ी कई अनकही यादें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि कैसे एक मराठी आर्टहाउस अभिनेत्री के रूप में, उनके लिए इस तरह की ग्लैमराइज्ड फिल्म का हिस्सा बनना चुनौतीपूर्ण था।

शुरुआती डर और ज़ोया अख्तर का साथ

सोनाली ने खुलासा किया कि वे एक साधारण महाराष्ट्रीयन परिवार से आती हैं और उस समय उन्हें फैशन या लग्जरी की ज्यादा समझ नहीं थी। उन्हें डर था कि क्या वे इस आधुनिक सेट पर फिट हो पाएंगी। उन्होंने कहा, "मुझे फैशन या लग्जरी का ज्ञान नहीं था। लेकिन ज़ोया अख्तर ने मेरा साथ दिया। वे बहुत ही जमीन से जुड़ी हुई और सिनेमा के प्रति जुनूनी हैं।" ज़ोया ने ही उन्हें ऑडिशन के लिए प्रेरित किया, जहाँ उन्होंने और ज़ोया ने मिलकर काफी मस्ती की थी।

सेट पर अनुशासन और प्रोफेशनलिज्म

सोनाली के अनुसार, 'दिल चाहता है' का सेट उस दौर के हिसाब से बहुत ही अनुशासित था। जहाँ उस समय मोबाइल फोन का चलन नया था, वहीं फिल्म के सेट पर समय की पाबंदी का कड़ा पालन किया जाता था। यदि शॉट का समय सुबह 9 बजे था, तो सब कुछ ठीक 9 बजे शुरू हो जाता था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि 'दिल चाहता है' ने न केवल बॉलीवुड में 'बडी कॉमेडी' शैली को पुनर्जीवित किया, बल्कि इसने अभिनेताओं के लिए काम करने के नए मानक भी स्थापित किए। इस फिल्म ने सैफ अली खान के करियर को एक नई दिशा दी और उन्हें एक 'मेट्रोसेक्सुअल' आइकन के रूप में स्थापित किया।

"दिल चाहता है केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि यह भारतीय सिनेमा में आधुनिकता और अनुशासन का संगम था," एक फिल्म समीक्षक ने कहा।

सोनाली ने अपने सह-कलाकार सैफ अली खान के साथ काम करने के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने सैफ को एक बहुत ही देखभाल करने वाला और शांत सह-कलाकार बताया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे सैफ अपने साथ संगीत लेकर चलते थे, जो उनके काम के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

क्या आप जानते हैं?: 'दिल चाहता है' फरहान अख्तर की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी, जिसने भारतीय सिनेमा में दोस्ती और शहरी जीवन के चित्रण को पूरी तरह बदल दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सोनाली कुलकर्णी ने 'दिल चाहता है' में कौन सा किरदार निभाया था?
सोनाली कुलकर्णी ने फिल्म में 'पूजा' का किरदार निभाया था, जो सैफ अली खान के किरदार समीर की प्रेम कहानी थी।

2. फिल्म 'दिल चाहता है' को कब रिलीज किया गया था?
यह फिल्म साल 2001 में रिलीज हुई थी और आज यह अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रही है।

संपादकीय टिप्पणी

सोनाली कुलकर्णी की यह कहानी दिखाती है कि प्रतिभा किसी भी बैकग्राउंड की मोहताज नहीं होती। 'दिल चाहता है' ने न केवल किरदारों को, बल्कि फिल्म निर्माण के अनुशासन को भी एक नई परिभाषा दी।