उत्तर-पश्चिम भारत में चल रही शुष्क हवाएं (Dry Air) मॉनसून की नमी को रोक रही हैं, जिससे दिल्ली, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बारिश की गतिविधियों में कमी आ सकती है।
देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में मॉनसून की रफ्तार पर एक नया संकट मंडरा रहा है। अल-नीनो के प्रभाव के बाद, अब उत्तर-पश्चिम से आ रही शुष्क हवाएं (Dry Air) मॉनसून की नमी युक्त हवाओं के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। मौसम विभाग (IMD) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस शुष्क हवा के प्रवाह के कारण दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
शुष्क हवाएं कैसे रोक रही हैं मॉनसून का रास्ता?
सामान्यतः, भारतीय मॉनसून अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी लेकर देश के भीतर प्रवेश करता है। हालांकि, वर्तमान में उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही गर्म और शुष्क हवाएं इस नमी को सोख रही हैं और बादलों के निर्माण की प्रक्रिया को बाधित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति 13 जुलाई तक बनी रह सकती है, जिससे पश्चिमी मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में आसमान साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।
क्या जुलाई के अंत में लौटेगी राहत?
मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों और आम जनता को आश्वस्त किया है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है। मौसम मॉडलों के अनुसार, 13 से 15 जुलाई के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure System) विकसित होने जा रहा है। यह नया सिस्टम पश्चिम की ओर बढ़ेगा, जिससे मॉनसून एक बार फिर सक्रिय होगा और मध्य व पूर्वी भारत में अच्छी बारिश का दौर शुरू होगा।
क्षेत्रीय प्रभाव और पूर्वानुमान
वर्तमान पूर्वानुमान के अनुसार, जहां उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश कम रहेगी, वहीं गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर राज्यों में अच्छी वर्षा जारी रहने की उम्मीद है। जुलाई के दूसरे भाग में, देश के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून का कुल औसत सामान्य रहने का अनुमान है, हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर भारी असमानता देखी जा सकती है।