अमेरिकी NOAA ने चेतावनी दी है कि वर्तमान एल नीनो 1950 के बाद सबसे तीव्र हो सकता है, जिससे भारत में मानसून की वर्षा में गिरावट आएगी। इस लेख में विशेषज्ञ विश्लेषण और भविष्य की संभावनाओं को विस्तार से समझाया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एल नीनो की तीव्रता 1950 के बाद सबसे अधिक हो सकती है
- भारत में मानसून की वर्षा 94% से नीचे गिरने की संभावना
- इंडियन ओशन डिपोल (IOD) का नकारात्मक प्रभाव मौजूदा एल नीनो को संतुलित नहीं कर पाएगा
संयुक्त राज्य राष्ट्रीय समुद्री और वायुमण्डलीय प्रशासन (NOAA) ने अपने मासिक बुलेटिन में कहा है कि अक्टूबर‑दिसंबर 2024‑25 तक 81% संभावना है कि एल नीनो बहुत ही तीव्र हो जाएगा, जिससे यह 1950 से उपलब्ध सबसे बड़े घटनाओं में गिना जाएगा। यह जलवायु पैटर्न प्रशांत महासागर के सतह तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण उत्पन्न होता है और विश्व भर में मौसम को अस्थिर कर देता है।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
एल नीनो‑सदर्न ओसिलेशन (ENSO) दो चरणों – एल नीनो और ला नीना – से मिलकर बनता है, जो समुद्र‑वायुमण्डलीय अंतःक्रिया को दर्शाते हैं। 2015‑16 का “गॉडज़िला” एल नीनो विश्व रिकॉर्ड में सबसे मजबूत माना जाता है, जबकि 1997‑98, 1991‑92 और 1982‑83 के घटनाक्रम भी अत्यधिक तीव्र रहे हैं। इन घटनाओं ने विश्वभर में सूखे, हीटवेव और असामान्य वर्षा पैटर्न को जन्म दिया।
भारत में मौजूदा प्रभाव
इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने 9 जुलाई की साप्ताहिक अपडेट में कहा कि जुलाई के अंत तक पूरे देश में औसत से थोड़ी कम वर्षा होगी, विशेषकर राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल के कुछ भागों को छोड़कर। जुलाई में भारत का उच्चतम मौसमी वर्षा गिरावट का पहला संकेत हो सकता है, जिससे कुल वार्षिक मानसून की वर्षा 94% से नीचे गिरने की संभावना है।
इंडियन ओशन डिपोल (IOD) की भूमिका
इंडियन ओशन डिपोल, जो ENSO का भारतीय महासागर समकक्ष है, वर्तमान में तटस्थ स्थिति में है। सकारात्मक IOD चरण एल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित कर सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष ऐसा होना अत्यंत असंभव है। इस कारण, एल नीनो के प्रभावों का प्रत्यक्ष असर भारत में महसूस किया जाएगा।
आगे की संभावनाएँ
NOAA ने बताया कि वर्तमान एल नीनो घटना जून में शुरू हुई थी और 2027 की शुरुआत तक बढ़ते रहने की संभावना है। वर्तमान में Niño 3.4 इंडेक्स 1.2 °C पर है, जो मध्यम सीमा में है; 1.5 °C से ऊपर जाने पर इसे “strong” और 2 °C से ऊपर “very strong” माना जाता है। बुलेटिन में 97% संभावना जताई गई है कि यह घटना अगले वर्ष के शुरुआती वसंत तक जारी रहेगी। इस परिदृश्य में, भारत को अनुकूलन रणनीतियों को तेज़ी से लागू करना होगा, विशेषकर जल संरक्षण, कृषि योजना और आपदा प्रबंधन में।