संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा ‘Soil Hero Guardian’ प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले कोयंबटूर के किसान वैलुवन ने प्राकृतिक एवं वृक्ष‑आधारित खेती की ओर बदलाव का आह्वान किया है। 2009 से अपनाई गई बहु‑स्तरीय, बहु‑फसल प्रणाली ने उनकी आय को तीन‑गुना कर दिया और 32 एकड़ में 9,600 पेड़ लगाए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- VT Valluvan को UN FAO ने ‘Soil Hero Guardian’ में तीसरा स्थान दिलाया।
- बहु‑स्तरीय, वृक्ष‑आधारित कृषि से 1.56% तक मिट्टी में कार्बन बढ़ा।
- प्राकृतिक खेती से आय में 2.5 गुना वृद्धि और जल संरक्षण संभव।
VT Valluvan, 59 वर्षीय किसान, कोयंबटूर के पॉलाचि जिले के वेट्टाइक़रणपुर में स्थित हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UN FAO) के ‘Soil Hero Guardian’ प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया, जिससे भारत को पहली बार इस मान्यता का लाभ मिला।
परिचय और परिवर्तन की कहानी
2006 से 2009 तक वैलुवन ने 7.5 एकड़ भूमि पर एकल फसल (monocrop) उगाकर लगातार नुकसान झेले। 2009 में उन्होंने अपने खेत को बहु‑स्तरीय, बहु‑फसल, वृक्ष‑आधारित प्रणाली में बदल दिया। तब से उन्होंने 14 विभिन्न फसलों को उगाया, 32 एकड़ में 9,600 पेड़ लगाए और मिट्टी में कार्बन सामग्री को 1.56% तक बढ़ाया। इस परिवर्तन ने उनकी आय को प्रति एकड़ 2.5 गुना बढ़ा दिया।
प्राकृतिक खेती के मुख्य कदम
वैलुवन के अनुसार, किसानों को सबसे पहले मिट्टी, जल और भू‑सर्वेक्षण कराना चाहिए, चाहे उन्हें अपना ज़मीन कितना भी परिचित हो। इसके बाद ड्रिप इरिगेशन अपनाना चाहिए, क्योंकि सरकार इस पर सब्सिडी देती है। उचित योजना, विशेषकर बरसात के पहले, निवेश को कम करती है और जल उपयोग को घटाती है।
जब नारियल के बाग होते हैं, तो वैलुवन ने इंटर‑क्रॉपिंग की सलाह दी है। उन्होंने 14 अलग‑अलग ऊँचाई वाली फसलों को चुना, जिसमें ट्यूबर्स, केले और नारियल शामिल हैं। इन फसलों को गाय के गोबर और मूत्र से पोषित किया जाता है, जबकि मल्चिंग से मिट्टी की नमी बनी रहती है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
केले और नारियल जैसी फसलें पहले साल से ही राजस्व उत्पन्न करती हैं, जबकि अन्य फसलों का लाभ समय के साथ घटता जाता है। वैलुवन ने कहा, “परम्परागत खेती स्वावलंबी थी; प्राकृतिक एवं वृक्ष‑आधारित कृषि इस आत्मनिर्भरता को फिर से स्थापित करती है।” उनका बेटा, जो डॉक्टर हैं, अब भी खेती में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, जिससे अगली पीढ़ी में भी इस मॉडल की रुचि बनी रहती है।
वैलुवन ने 2017 से अब तक 7,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया है, जिससे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की गति तेज़ हुई है। उनका संदेश स्पष्ट है: “मिट्टी को स्वस्थ रखें, जल को बचाएँ, और सतत आय के लिए प्राकृतिक प्रणाली अपनाएँ।”