एक हफ्ते की हल्की बारिश के बाद भारत का मानसून फिर से कमजोर हो गया, जिससे राष्ट्रीय वर्षा घाटा 18% तक बढ़ गया। अगले सात दिनों में उत्तर‑पश्चिम, मध्य‑पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीप में हल्की वर्षा की संभावना है, जो कृषि बोआई में देरी कर सकती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • देशव्यापी मानसून घाटा 18% तक बढ़ा
  • पश्चिम और दक्षिणी भारत में अगले सप्ताह हल्की वर्षा की संभावना
  • 15 राज्यों में 20% या अधिक बारिश कमी दर्ज

इंडियन मेटरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने रविवार को बताया कि उत्तर‑पश्चिम और मध्य‑पश्चिम के मैदानों के साथ-साथ दक्षिणी प्रायद्वीप में अगले छह‑सात दिनों में "सौम्य वर्षा" होगी। यह मौसम‑विज्ञानिक संकेत इस बात को दर्शाता है कि इस समय भारत का मानसून फिर से सूखे के चरण में प्रवेश कर रहा है, जबकि पिछले सप्ताह की बौछारों ने घाटे को 40% से घटाकर 14% कर दिया था।

पिछले सप्ताह की अस्थायी राहत

जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई निरंतर बौछारों ने मानसून घाटे को घटाने में मदद की, परंतु यह राहत अल्पकालिक रही। 12 जुलाई तक का समग्र (1 जून‑12 जुलाई) जलवर्षा डेटा दिखाता है कि बिहार, झारखंड, पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित 15 राज्यों में 20% से अधिक की कमी दर्ज की गई, कुछ क्षेत्रों में यह कमी 73% तक पहुंच गई।

एल नीनो का प्रभाव

वर्तमान में एक मजबूत एल नीनो घटना सक्रिय है, जो पैसिफिक महासागर के मध्य‑पूर्वी भाग में समुद्र सतह के तापमान को सामान्य से ऊपर ले जाती है। ऐतिहासिक रूप से एल नीनो भारत में कमजोर मानसून, कम वर्षा और कठोर गर्मियों से जुड़ा रहता है। इस बार भी, जब एली नीनो की तीव्रता अधिक है, तब मानसून की सक्रियता में गिरावट देखी जा रही है, जिससे कृषि क्षेत्र विशेष रूप से जल‑निर्भर फसलों के लिए जोखिम में पड़ रहा है।

कृषि पर संभावित असर

कृषि सिचाई का बड़ा हिस्सा मौसमी वर्षा पर निर्भर करता है, विशेषकर मध्य‑पश्चिमी मानसून कोर क्षेत्र में जहाँ सिंचाई सुविधाएँ सीमित हैं। हालिया सूखे की अवधि से बोआई में हुई प्रगति खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि इस वर्ष अभी तक कुल बोआई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में कम है। यदि अगले सप्ताह की अनुमानित हल्की वर्षा भी घाटे को पूरी तरह भर नहीं पाती, तो धान, मक्का और ज्वार जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार पर दबाव बना रहेगा।

भविष्य की दिशा

IMD ने उत्तर‑पूर्वी भारत में अगले दो‑तीन दिनों में "भारी‑से‑बहुत भारी" वर्षा की आशा जताई है, जबकि बंगाल और बिहार में भी कुछ तीव्र बौछारें संभावित हैं। हालांकि, इन बौछारों की मात्रा कुल घाटे को पाटने के लिए पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस महीने के अंत तक भी वर्षा की कमी बनी रहती है, तो सरकार को कृषि जल प्रबंधन, जलभंडारण और वैकल्पिक सिंचाई उपायों को तेज़ी से लागू करना पड़ेगा।