गुजरात सरकार ने शेर के हमले में 11‑वर्षीय बच्चे की मृत्यु के बाद गिर्नर की तीर्थयात्रा मार्गों पर थर्मल ड्रोन और 25 वन ट्रैकर लगाए। यह कदम वन्यजीवों के साथ मनुष्यों के टकराव को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये उठाया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • गिर्नर और दातार सीढ़ी मार्ग को ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित किया जाएगा।
  • थर्मल ड्रोन निगरानी और 25 वन ट्रैकर तैनात किए जाएंगे।
  • स्थायी चेक‑पोस्ट और व्यापक SOP के साथ सुरक्षा बढ़ेगी।

गुजरात के जुनागढ़ जिले में स्थित गिर्नर पर्वत, जहाँ हर साल हजारों तीर्थयात्री पवित्र मंदिर तक पहुँचते हैं, अब सुरक्षा के नए मानकों पर खड़ा है। 11 जुलाई को दातार पहाड़ी पर शेर द्वारा 11‑वर्षीय मैयूर चौहान की मौत के बाद राज्य ने त्वरित कार्रवाई की, जिससे इस क्षेत्र में थर्मल ड्रोन कैमरे और वन ट्रैकर नियुक्त किए जाएंगे।

पृष्ठभूमि और घटना

दातार पहाड़ी पर लगभग 3,000 सीढ़ियों वाला एक कठिन ट्रेक है। मैयूर चौहान, जो केडाह जिले के मोदाज गांव से आया था, अपने परिवार के साथ मुख्य प्रवेश द्वार से लगभग 50 कदम आगे शेर के सामने आया। शेर ने बच्चे को पकड़ कर जंगल में ले जाकर मार डाला, जिससे तीर्थयात्रियों में सुरक्षा की चिंता तेज हो गई।

सरकारी प्रतिक्रिया

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोधवड़िया ने इस घटना के बाद एक आपातकालीन बैठक बुलाकर कई उपाय घोषित किए। इनमें 25 वन ट्रैकर की नियुक्ति, गिर्नर और दातार सीढ़ी मार्ग को ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित करना, संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी चेक‑पोस्ट स्थापित करना और थर्मल ड्रोन के माध्यम से निरंतर वन्यजीव निगरानी शामिल है। साथ ही, यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिससे वन्यजीवों के साथ उचित व्यवहार सिखाया जा सके।

विस्तृत सुरक्षा योजना

नए SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) को जुनागढ़ जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी प्रशासनिक विभागों के सहयोग से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, वन्यजीव प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और अंतर‑विभागीय समन्वय को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य शेर और अन्य वन्यजीवों की प्राकृतिक आवास को बाधित किए बिना मानव‑वन्यजीव टकराव को न्यूनतम करना है।

भविष्य की दिशा

गुजरात में शेर के हमले की घटनाएं हाल ही में बढ़ी हैं, जिसमें जुलाई में दो और जानलेवा हमले शामिल हैं। इन घटनाओं ने राज्य को वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश की है। ड्रोन‑आधारित थर्मल इमेजिंग और सतत ट्रैकरिंग जैसी तकनीकी उपाय न केवल तत्काल सुरक्षा प्रदान करेंगे, बल्कि भविष्य में डेटा‑आधारित नीति निर्माण में भी मदद करेंगे।