भारतीय मौसम विभाग ने कोलकाता और आसपास के जिलों के लिए नारंगी चेतावनी और उत्तर बंगाल के लिए लाल अलर्ट जारी किया है। सक्रिय मानसून ट्रफ़ और बंगाल की खाड़ी से भारी नमी के कारण अगले 48 घंटे में तेज बारिश और बाढ़ की संभावना है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कोलकाता में नारंगी चेतावनी जारी
  • जल्पैगुड़ी, अलिपुरदुर्ग में लाल अलर्ट
  • अगले 48 घंटे में तेज बारिश और बाढ़ की संभावना

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पश्चिम बंगाल के उपहिमालयीय क्षेत्रों में सक्रिय मानसून ट्रफ़ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली ऊपरी वायु साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण गंभीर लाल अलर्ट जारी किया है। यह प्रणाली पूरे राज्य में तेज़ वर्षा, गड़गड़ाहट और तेज़ हवाओं को उत्पन्न कर रही है।

कोलकाता में स्थिति

कोलकाता, उत्तर 24 परगना, होराह, नादिया और हुगली जिलों में तुरंत नारंगी चेतावनी लागू की गई है। अगले 24 घंटों में 30‑40 किमी/घंटा तक की तेज़ हवाएं, मध्यम थंडरशॉवर और लगातार बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान लगभग 31°C और न्यूनतम 26°C रहने की भविष्यवाणी है, जबकि आर्द्रता 98% तक पहुँच सकती है। इससे शहर में जलभराव, ट्रैफ़िक जाम और अस्थायी जल स्तर में वृद्धि की आशंका है।

दक्षिणी और पश्चिमी जिलों की चेतावनियाँ

बनकुरा और पश्चिमी बर्दमान जिलों में पीला चेतावनी जारी है, जहाँ हल्की‑मध्यम गड़गड़ाहट और 30‑40 किमी/घंटा की तेज़ हवाएं चल रही हैं। 15‑16 जुलाई तक मौसम अधिक तीव्र होने की संभावना है, जिसमें 40‑50 किमी/घंटा तक की तेज़ हवाएं तटीय क्षेत्रों में और 30‑40 किमी/घंटा आंतरिक जिलों में दर्ज की गई हैं।

उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में गंभीर खतरा

जल्पैगुड़ी और अलिपुरदुर्ग में तुरंत लाल अलर्ट जारी किया गया है, जहाँ 20 सेमी से अधिक बारिश की संभावना है। दरजीलींग, कालिम्पोंग और कूच बिहार में भी 7‑20 सेमी के बीच भारी बारिश के चेतावनी संकेत जारी हैं। तेज़ वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में संभावित भूस्खलन और टेस्ता, तोर्सा, जालधाका और रैडाक नदियों में जलस्तर में तेज़ वृद्धि की आशंका है।

सुरक्षा उपाय और सार्वजनिक सलाह

IMD ने जनता को बिजली गिरने के समय सुरक्षित स्थानों में शरण लेने, बिजली के पोल या पेड़ों के पास न रहने, खुले मैदान और जल निकायों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। साथ ही, 15‑17 जुलाई तक पश्चिम बंगाल के तटवर्ती क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में जाने से रोकने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि हवाओं की गति 55 किमी/घंटा तक पहुँच सकती है।