बॉम्बे नगर निगम ने धरावी पुनर्विकास परियोजना के लिए मुलुंड लैंडफिल के 15 एकड़ भू‑भाग को पाँच‑साल की लीज़ पर किराए पर दिया। इस कदम से निकट‑भविष्य में लगभग ₹103 करोड़ की आय की उम्मीद है, साथ ही लैंडफिल की सफ़ाई भी होगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बॉम्बे निगम ने मुलुंड लैंडफिल के 15 एकड़ को धरावी परियोजना के SPV को 5‑वर्षीय लीज़ पर दिया।
- लीज़ से अनुमानित राजस्व ₹103.47 करोड़, शुद्ध लाभ ₹83 करोड़ (कचरा हटाने के खर्च को घटाकर)।
- नवभारत मेगा डिवेलपर्स प्रा. ली. (अडानी‑महाराष्ट्र संयुक्त) द्वारा तैयार‑मिक्स कंक्रीट प्लांट और कास्टिंग यार्ड स्थापित किया जाएगा।
बॉम्बे नगर निगम (बीएमसी) ने धरावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) के तहत पहले 124 एकड़ देओनार लैंडफिल को सौंपने के बाद, अब मुलुंड लैंडफिल के 15 एकड़ भू‑भाग को विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) को किराए पर दिया। यह प्रस्ताव कई महीनों से नगर प्रशासन के भीतर चर्चा में रहा और इस महीने के अंत में बीएमसी के सुधार समिति के सामने मंज़ूरी के लिये रखा जाएगा।
पृष्ठभूमि एवं रणनीतिक महत्व
धरावी परियोजना, जो भारत की सबसे बड़ी स्लम पुनर्विकास पहलों में से एक है, अडानी समूह और महाराष्ट्र सरकार की संयुक्त कंपनी नवभारत मेगा डिवेलपर्स प्रा. ली. (NMDPL) द्वारा लागू की जा रही है। जबकि देओनार लैंडफिल से आवासीय इकाइयाँ तैयार की जा रही हैं, मुलुंड भू‑भाग को कंक्रीट उत्पादन और कास्टिंग यार्ड के लिये उपयोग किया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य तेज़ और लागत‑प्रभावी होगा।
वित्तीय शर्तें और राजस्व मॉडल
लीज़ किराया प्रति वर्ग मीटर ₹252 निर्धारित किया गया है। NMDPL ने पहले छह महीने का अग्रिम भुगतान ₹9.17 करोड़ किया, उसके बाद हर माह ₹1.52 करोड़ का किराया देगी, जिसमें हर छह महीने पर 6 % की वृद्धि होगी। पाँच साल में कुल आय ₹103.47 करोड़ अनुमानित है। हालाँकि, लैंडफिल के शेष मलबे को साफ़ करने के लिये NMDPL को ₹20 करोड़ का खर्च उठाना पड़ेगा, जिसे किराया से घटा दिया जाएगा, जिससे शुद्ध राजस्व ₹83 करोड़ रहेगा।
पर्यावरणीय सफ़ाई एवं दीर्घकालिक प्रभाव
मुलुंड लैंडफिल 1968‑2018 तक कार्यरत रहा, जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे वैज्ञानिक रूप से बंद करने और पुनर्स्थापना करने का आदेश दिया। बीएमसी ने तब से बायो‑माइनिंग के माध्यम से लगभग ₹80 लाख मीट्रिक टन कचरा निकाला, जिसमें से 50 लाख टन की सफ़ाई पूरी हो चुकी है। कोविड‑19, प्राकृतिक आपदाओं और वैश्विक आपूर्ति‑श्रृंखला में बाधाओं के कारण कार्य में देरी हुई, पर फरवरी 2026 तक 90 % बायो‑माइनिंग पूरी हो चुकी है। शेष काम अगले दशक में पूरा होगा।
भविष्य की संभावनाएँ
यह लीज़ न केवल बीएमसी को महत्वपूर्ण राजस्व प्रदान करेगी, बल्कि धरावी परियोजना के निर्माण चरण को तेज़ करेगी। साथ ही, लैंडफिल के पुनर्स्थापन से पर्यावरणीय बोझ घटेगा और मुलुंड के आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता एवं सुदृढ़ बुनियादी ढाँचे की नींव रखी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य शहरों में दोहराया गया, तो शहरी पुनर्विकास और कचरा प्रबंधन दोनों में स्थायी सुधार संभव है।