20 जुलाई को गुरुग्राम में हुए विरोध में चार लोगों को पेलट गोलियों से घायल किया गया, जिससे RAF के ‘संवेदनशील पुलिसिंग’ सिद्धांत और मैनुअल पर सवाल उठे हैं। पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट में पेलट गोलियों पर प्रतिबंध की मांग की है।

मुख्य बिंदु

  • गुरुग्राम में 20 जुलाई को 4 नागरिक पेलट गोलियों से घायल हुए
  • RAF के ‘संवेदनशील पुलिसिंग’ मैनुअल की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल
  • पीड़ितों ने पेलट गोलियों पर प्रतिबंध के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

गुरुग्राम में 20 जुलाई को आयोजित विरोध में, चार नागरिकों को रूढ़िवादी प्रतिरोध बल (RAF) द्वारा पेलट गोलियों से गंभीर चोटें आईं। इस घटना ने RAF के “संवेदनशील पुलिसिंग” सिद्धांत और उसके संचालन मैनुअल को सार्वजनिक जांच के दायरे में ला दिया है।

पीड़ितों ने बताया कि उन्हें बिना चेतावनी के पेलट गोलियों से निशाना बनाया गया, जिससे चेहरे, आँखों और टांगों में गंभीर चोटें आईं। इस पर विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने तेज़ी से प्रतिक्रिया दी और पेलट गोलियों के उपयोग पर प्रतिबंध की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि पेलट गोलियों का उपयोग नागरिकों के प्रति अत्यधिक बल प्रयोग है और यह भारत के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए समय निर्धारित किया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पेलट गोलियों का उपयोग भारत में 1990 के दशक से पुलिस द्वारा प्रदर्शन नियंत्रण के लिए किया जा रहा है। कई बार इस हथियार के उपयोग से अनजाने में गंभीर चोटें और कभी‑कभी मौतें भी हुई हैं, जिससे राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ी है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस घटना ने न केवल RAF के प्रशिक्षण प्रोटोकॉल को चुनौती दी है, बल्कि व्यापक रूप से पुलिस सुधार और नागरिक अधिकारों के मुद्दे को भी उजागर किया है।

"पेलट गोलियों का निरंकुश उपयोग लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ एक गंभीर उल्लंघन है," ने मानवाधिकार विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा कहा।
क्या आप जानते हैं?: भारत में पेलट गोलियों के पहले आधिकारिक उपयोग का रिकॉर्ड 1993 में दिल्ली के एक बड़े विरोध में है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पेलट गोलियों के उपयोग पर वर्तमान कानून क्या है?

उत्तर: अभी भी पुलिस को कुछ परिस्थितियों में पेलट गोलियों का उपयोग करने की अनुमति है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इस पर पुनः विचार किया जा रहा है।

प्रश्न 2: पीड़ितों ने कौन से मुआवजे की मांग की है?

उत्तर: पीड़ितों ने चिकित्सा सहायता, पुनर्वास और भविष्य में पेलट गोलियों के उपयोग पर प्रतिबंध की माँग की है।