महाराष्ट्र सार्वजनिक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायक रोहित पवार के कागज़ लीक के आरोपों के बाद ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा की जांच का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता ने बाद में आरोप वापस ले लिए, पर आयोग ने पुलिस जांच को जारी रखने की पुष्टि की।
मुख्य बिंदु
- रोहित पवार ने कागज़ लीक का आरोप लगाया
- एमपीएससी ने जांच का आदेश दिया, भले ही शिकायतकर्ता ने आरोप वापस ले लिए
- पुलिस और संभावित CBI जांच की संभावना
महाराष्ट्र सार्वजनिक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने 22 मार्च 2026 को आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एक व्यापक जांच का आदेश दिया। राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायक रोहित पवार ने कहा कि नंदुर्बर के एक कोचिंग संस्थान से प्रश्नपत्र दो दिन पहले मोबाइल पर पहुँचाया गया था।
पवार ने यह भी दावा किया कि सरकारी अधिकारियों के बच्चों ने उच्च रैंक प्राप्त की, जबकि कट‑ऑफ़ से नीचे अंक वाले उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। लगभग 44,500 अभ्यर्थियों में से केवल 150 को अंतिम चयन के लिए बुलाया गया था।
शिकायत के बाद पवार ने 21 जुलाई को एमपीएससी को औपचारिक शिकायत दायर की, लेकिन आयोग की धीमी प्रतिक्रिया पर उन्होंने एमपीएससी, FDA और CBI से व्यापक जांच की माँग की। उन्होंने FIR दर्ज़ होने, फ़ॉरेन्सिक जांच और व्हॉट्सएप चैट्स की प्राप्ति की भी मांग की।
कोचिंग संस्थान के निदेशक प्रवीण पाटिल ने इन आरोपों को खारिज किया, यह कहा कि उनका संस्थान किसी भी कागज़ लीक में शामिल नहीं है। अन्य राजनीतिक नेताओं, जैसे कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सापकाल और शिवसेना की सुश्मा अंधारे, ने भी निष्पक्ष जांच की माँग की।
एमपीएससी के चेयरमैन विवेक भीमवार ने कहा कि 21 जुलाई को शिकायत प्राप्त हुई, 23 जुलाई को स्क्रीनशॉट जमा किए गए, लेकिन शिकायतकर्ता ने 27 जुलाई को बुलावे पर उपस्थित नहीं हुए। बाद में शिकायतकर्ता ने ई‑मेल में दावा वापस ले लिया, यह कहते हुए कि वायरल दस्तावेज़ वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल नहीं खाता। फिर भी, आयोग ने पुलिस को स्वतंत्र जांच के लिए संदर्भित किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
एमपीएससी ने पिछले वर्षों में भी कई भर्ती परीक्षाओं में संदेहास्पद irregularities के कारण जांच का सामना किया है, जैसे 2022 में पुलिस अधिकारी चयन प्रक्रिया में लीक के आरोप। ऐसे मामलों ने राज्य में सार्वजनिक सेवा आयोग की विश्वसनीयता को चुनौती दी है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that any perception of bias or leak in a high‑stakes recruitment exam erodes public trust, hampers merit‑based hiring, and can trigger political unrest, especially in a state as populous as Maharashtra.
"यदि लीक सिद्ध होती है, तो यह न केवल उम्मीदवारों के भविष्य को बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है," कहा गया एक सार्वजनिक प्रशासन विशेषज्ञ ने।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या कोई आधिकारिक FIR दर्ज़ हुई है?
A1: अभी तक आधिकारिक तौर पर FIR दर्ज़ नहीं हुई है, लेकिन आयोग ने पुलिस को जांच के लिए संदर्भित किया है।
Q2: उम्मीदवारों को इस विवाद से कैसे प्रभावित होगा?
A2: यदि लीक सिद्ध होती है तो परीक्षा परिणाम रद्द हो सकते हैं, जिससे चयन प्रक्रिया में देरी होगी।