भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिकों ने एक प्लेसेंटा-ऑन-चिप का विकास किया है जो गर्भावस्था में दवाओं, प्रदूषकों और संक्रमणों के प्रभाव को समझने में मदद कर सकता है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी प्लेटफ़ॉर्म विकसित की है जो प्लेसेंटा की मुख्य कार्यों को मिमिक्र करने के लिए एक प्लेसेंटा-ऑन-चिप का उपयोग करती है। यह अनुसंधानकर्ताओं को गर्भावस्था में दवाओं, प्रदूषकों और संक्रमणों के प्रभाव को समझने में मदद कर सकता है और गर्भस्थ शिशुओं को बचाने में सहायता कर सकता है।
प्लेसेंटा-ऑन-चिप एक प्रकार का डिवाइस है जो सूक्ष्म जीवों को विकसित करने के लिए एक पोरस मेम्ब्रेन का उपयोग करता है। यह प्लेसेंटा की कोशिकाओं को विकसित करने के लिए एक स्थिर दो-कम्बर प्लेटफ़ॉर्म है जो गर्भावस्था में दवाओं, प्रदूषकों और संक्रमणों के प्रभाव को समझने में मदद कर सकता है।
इस प्लेटफ़ॉर्म के विकास के लिए IIT Bombay और ICMR-National Institute for Research on Women's Health के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया है। उनका दावा है कि यह प्लेटफ़ॉर्म प्लेसेंटा की जैविक संरचना को मिमिक्र करने में सक्षम है। यह प्लेसेंटा की कोशिकाओं को विकसित करने के लिए एक स्थिर दो-कम्बर प्लेटफ़ॉर्म है जो गर्भावस्था में दवाओं, प्रदूषकों और संक्रमणों के प्रभाव को समझने में मदद कर सकता है।
यह प्लेटफ़ॉर्म गर्भावस्था में दवाओं, प्रदूषकों और संक्रमणों के प्रभाव को समझने में मदद करने के अलावा गर्भावस्था में दवाओं की सुरक्षा को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है।