पुडुचेरी में 10,000 स्कूल‑और कॉलेज छात्रों को आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता बनाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह पहल ICMR, जेआईपीएमईआर, और केयर मैक्स फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के सहयोग से ‘मिशन जीवन‑युवा सुरक्षा कोर’ के तहत कार्यान्वित होगी।

पुडुचेरी में स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग दस हजार छात्रों को आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में प्रथम प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करने का निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान प्राथमिकता परियोजना ICMR के INDIA‑EMS प्रोजेक्ट, जेआईपीएमईआर की आपातकालीन चिकित्सा विभाग, ‘मेरा युवा भारत’ (मिनिस्ट्री ऑफ़ युथ अफेयर्स के तहत एक स्वायत्त संस्था), और केयर मैक्स फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से चलाया जाएगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा और लक्ष्य

‘मिशन जीवन‑युवा सुरक्षा कोर’ का उद्घाटन पिटेट सेमिनेरि हाईयर सेकेंडरी स्कूल में हुआ, जहाँ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशक सेव्वेल ने मुख्य भाषण दिया। प्रारंभिक चरण में 200 छात्रों ने वैज्ञानिक सत्र में भाग लिया, जहाँ उन्हें हँड‑ऑन CPR, रक्तस्राव नियंत्रण, बुनियादी ट्रॉमा रिस्पॉन्स, ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) की जागरूकता और आपातकालीन संचार के बारे में प्रशिक्षित किया गया।

इतिहासिक पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय संदर्भ

भारत में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच में अक्सर देरी होती है, विशेषकर ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि हर मिनट की देरी कार्डियाक अरेस्ट जैसी स्थितियों में जीवित रहने की संभावना को 10% तक घटा देती है। इस संदर्भ में, युवा वर्ग को प्रथम प्रतिक्रिया कौशल से लैस करना न केवल मृत्यु दर घटाने में मदद करेगा, बल्कि दीर्घकालिक अपंगता को भी रोकेगा। पिछले कुछ सालों में कई राज्यों ने समान पहल शुरू की है, लेकिन पुडुचेरी की यह योजना छात्रों की संख्या और बहु‑संस्थागत सहयोग के कारण विशेष महत्व रखती है।

भविष्य की संभावनाएँ और प्रभाव

प्रशिक्षण के बाद छात्र स्वयंसेवक बनकर स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों में नियमित ड्रिल आयोजित करेंगे। इस मॉडल को सफल पाते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार का प्रस्ताव भी रखा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी युवा‑आधारित प्रथम प्रतिक्रिया नेटवर्क न केवल आपातकालीन सेवाओं की पहुँच को तेज करेगी, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता को भी नई दिशा देगी।

निष्कर्ष

‘मिशन जीवन‑युवा’ छात्रों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में लागू होने वाले कौशल प्रदान करता है। यदि यह पहल सफल रहती है, तो यह भारत में प्रथम प्रतिक्रिया प्रशिक्षण के लिए एक मानक स्थापित कर सकता है, जिससे भविष्य की पीढ़ी अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्य‑सजग बन सकेगी।