भारत सरकार ने नकली दवाओं को रोकने के लिए दवा पैकेज पर QR कोड लागू किया है। उपभोक्ता इस कोड को स्कैन करके दवा की प्रामाणिकता, बैच नंबर और अनुमोदन विवरण तुरंत जाँच सकते हैं।
दवा उद्योग में नकली उत्पादों का प्रकोप वर्षों से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा रहा है। इस समस्या को सुलझाने के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने QR कोड को एक डिजिटल पहचान पत्र के रूप में अपनाया है, जिससे प्रत्येक वैध दवा के पैकेज पर एक अद्वितीय कोड अंकित किया जाता है।
परिचय
भारत में हर साल लाखों लोग नकली दवाओं के कारण स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझते हैं। पारम्परिक लेबलिंग और सीरियल नंबर अक्सर जालसाजों द्वारा दोहराए जा सकते थे, इसलिए सरकार ने एक सुरक्षित, स्केलेबल और उपभोक्ता‑मित्र तकनीक की खोज की। QR कोड, जो स्मार्टफ़ोन कैमरा से पढ़ा जा सकता है, इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
क्यूआर कोड का कार्यप्रणाली
जब उपभोक्ता दवा के पैकेज पर स्थित QR कोड को स्कैन करता है, तो वह एक सुरक्षित क्लाउड डेटाबेस से जुड़ता है जहाँ दवा का नाम, निर्माता, लाइसेंस नंबर, बॅच संख्या, उत्पादन तिथि और वैधता की जानकारी संग्रहीत होती है। यदि कोड वैध है, तो स्क्रीन पर “प्रामाणिक” संदेश दिखता है; यदि कोड टूटे या अनधिकृत है, तो चेतावनी प्रदर्शित होती है। यह प्रक्रिया केवल कुछ सेकंड में पूरी हो जाती है, जिससे उपभोक्ता को तुरंत निर्णय लेने की सुविधा मिलती है।
सरकारी पहल और नियामक दिशा‑निर्देश
2022 में लॉन्च की गई “डिजिटल दवा ट्रेसेबिलिटी” पहल के तहत, CDSCO ने सभी निर्माताओं को अनिवार्य किया कि वे अपने प्रत्येक उत्पाद पर QR कोड लगाएँ। इस पहल को लागू करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की प्लेटफ़ॉर्म – इंडिया मेडिकेयर पोर्टल – विकसित किया गया है, जिसमें राज्य स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी और रिटेलर्स भी डेटा सत्यापन में भाग लेते हैं। साथ ही, उपभोक्ताओं को QR कोड स्कैन करने के लिए मुफ्त मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराया गया है।
उपभोक्ता के लिए कदम
1. दवा खरीदते समय पैकेज पर QR कोड देखें। 2. आधिकारिक मोबाइल ऐप या किसी भी QR स्कैनर से कोड स्कैन करें। 3. स्क्रीन पर दिखने वाले विवरणों की तुलना दवा के लेबल से करें। 4. यदि कोई विसंगति दिखे, तो तुरंत फ़ार्मासिस्ट या स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी को सूचित करें। 5. अनिश्चित दवाओं को वापस करके रिफंड की मांग करें।
भविष्य की संभावनाएँ
नकली दवाओं के खिलाफ यह डिजिटल रक्षा प्रणाली केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस मॉडल को अन्य विकासशील देशों के लिए एक ब्लूप्रिंट माना है। आने वाले वर्षों में ब्लॉकचेन‑आधारित ट्रेसिंग, AI‑संचालित जोखिम विश्लेषण और रीयल‑टाइम अलर्ट सिस्टम को जोड़कर इस इकोसिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। अंततः, जब उपभोक्ता हर दवा को स्कैन करके पुष्टि कर सकेंगे, तो नकली दवाओं की माँग ही समाप्त हो जाएगी।