9‑11 जुलाई को चेंनई में आयोजित 3‑दिन की कांग्रेस में 250 से अधिक प्रतिनिधियों और 50 से अधिक राष्ट्रीय‑अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और क्लिनिकल देखभाल के एकीकृत मॉडल पर चर्चा की। तमिलनाडु की शहरी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की पहल को भी प्रमुखता मिली।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 250 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी
  • 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने वक्तव्य दिया
  • नॉन‑कम्युनिकेबल रोगों के नियंत्रण में सार्वजनिक स्वास्थ्य और क्लिनिकल देखभाल के एकीकरण पर जोर

9 से 11 जुलाई 2026 तक चेंनई में आयोजित तीन‑दिन की राज्य‑स्तरीय कांग्रेस ने स्वास्थ्य‑क्षेत्र में एक नई दिशा स्थापित की। श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SRIHER) ने भारतीय प्रतिरक्षात्मक एवं सामाजिक चिकित्सा संघ (IAPSM) – तमिलनाडु अध्याय के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया।

पृष्ठभूमि और महत्व

भारत में नॉन‑कम्युनिकेबल रोग (NCDs) जैसे हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर और श्वसन रोगों की आवृत्ति निरंतर बढ़ रही है, और तमिलनाडु इस प्रवृत्ति से अछूता नहीं है। राज्य की जनसंख्या में शहरीकरण की दर तेज़ है, जिससे जीवनशैली‑संबंधी जोखिम कारक भी बढ़े हैं। इस संदर्भ में सार्वजनिक स्वास्थ्य और क्लिनिकल देखभाल के बीच तालमेल स्थापित करना, रोग रोकथाम और प्रारम्भिक उपचार के लिए अत्यावश्यक माना गया।

सम्मेलन की मुख्य बातें

सम्मेलन का मुख्य विषय "नॉन‑कम्युनिकेबल रोगों के नियंत्रण के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य और क्लिनिकल देखभाल का एकीकरण" था। तीन दिन में 250 से अधिक प्रतिनिधियों, जिसमें राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी, अकादमिक शोधकर्ता, NGOs और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल थे, ने सक्रिय रूप से भाग लिया। 50 से अधिक प्रतिष्ठित वक्ताओं ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने अनुभव साझा किए, जिनमें WHO प्रतिनिधि, विश्वसंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ और भारत के प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमुख शामिल थे।

राज्य सरकार की पहल

सम्मेलन के उद्घाटन में तमिलनाडु सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रतिबंधात्मक चिकित्सा निदेशक ए. सोमसुंदरम ने शहरी जनसंख्या में वृद्धि और इसके स्वास्थ्य‑परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राज्य ने अब तक 708 शहरी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (UHWCs) स्थापित कर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को व्यापक किया है। इन केंद्रों को रोग‑निवारण, स्क्रीनिंग और प्राथमिक उपचार के लिए एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

भविष्य की दिशा

सम्मेलन के निष्कर्षों ने राज्य के स्वास्थ्य नीतियों में NCDs के लिए एकीकृत देखभाल मॉडल को अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। विशेषज्ञों ने डेटा‑आधारित निगरानी, समुदाय‑आधारित जागरूकता कार्यक्रम और बहु‑क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से रोगों की रोकथाम को तेज़ करने का सुझाव दिया। इस दिशा में आगे की कार्यवाही में डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म, टेली‑मेडिसिन और सार्वजनिक‑निजी साझेदारी को प्रमुखता दी जाएगी।