न्यूरोनेक्स्ट फोरम में विशेषज्ञों ने बताया कि MRgFUS, एक FDA‑स्वीकृत अल्ट्रासाउंड‑आधारित उपचार, परिक्रिया‑रहित होने के कारण भारत में अभी भी सीमित है। उन्होंने इस तकनीक को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए नीति‑निर्माताओं को त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • MRgFUS एक गैर‑आक्रामक, FDA‑स्वीकृत उपचार है जो पार्किंसन रोगियों के जीवन की गुणवत्ता को सुधार सकता है।
  • भारत में इस उपचार की पहुंच अभी बहुत सीमित है, जबकि विदेशों में यह व्यापक रूप से उपयोग हो रहा है।
  • विशेषज्ञ नीति‑निर्माताओं से इस तकनीक को सार्वजनिक एवं निजी स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने की माँग कर रहे हैं।

न्यूरोनेक्स्ट फोरम, जो वट्टिकुट्टी फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया, ने भारत के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, रोगी और देखभालकर्ता को एक ही मंच पर लाया। सम्मेलन में डॉ. अनिरुद्ध भगवत, पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में न्यूरोसर्जन, ने कहा कि मैग्नेटिक रेज़ोनेंस‑गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (MRgFUS) एक प्रमुख, गैर‑आक्रामक उपचार है जो संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई विकसित देशों में व्यापक रूप से उपयोग हो रहा है, लेकिन भारत में अभी भी बहुत कम लोगों को इसका लाभ मिल रहा है।

पार्किंसन रोग में MRgFUS का महत्व

पार्किंसन रोग और एसेन्शियल टेमर जैसी गति विकारों में दवा के दुष्प्रभाव या सीमित प्रभावशीलता अक्सर रोगियों को गंभीर जीवन‑गुणवत्ता समस्याओं की ओर धकेल देती है। MRgFUS, जो MRI स्कैनर के भीतर लक्षित मस्तिष्क क्षेत्र को सटीक अल्ट्रासाउंड तरंगों से गर्म करता है, बिना किसी चीरा, सिलाई या खोपड़ी ड्रिलिंग के रोगी के लक्षणों को घटाता है। इस प्रक्रिया को आमतौर पर 90 मिनट से दो घंटे में पूरा किया जा सकता है, जिससे अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता भी न्यूनतम रहती है।

भारत में उपलब्धता की बाधाएँ

डॉ. भगवत ने बताया कि भारत में MRgFUS के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर – उच्च‑गुणवत्ता वाले MRI मशीनें, विशेषीकृत अल्ट्रासाउंड उपकरण और प्रशिक्षित टीम – बहुत कम संस्थानों में ही मौजूद है। इसके अतिरिक्त, बीमा एवं सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में इस उपचार को कवर नहीं किया जाता, जिससे आर्थिक बाधा उत्पन्न होती है। इस कारण कई रोगी, जो इस तकनीक से लाभ उठा सकते थे, पारंपरिक दवा या अधिक आक्रामक सर्जिकल विकल्पों की ओर झुकते हैं।

भविष्य की दिशा और सिफ़ारिशें

वट्टिकुट्टी फाउंडेशन के संस्थापक अभिनव वट्टिकुट्टी ने कहा, “न्यूरोनेक्स्ट फोरम का मुख्य उद्देश्य विशेषज्ञ ज्ञान को रोगियों और देखभालकर्ताओं तक पहुँचाना है, ताकि वे उपचार विकल्पों को समझ सकें और सशक्त निर्णय ले सकें।” उन्होंने नीति‑निर्माताओं से अनुरोध किया कि MRgFUS को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल किया जाए, सार्वजनिक‑निजी साझेदारी के माध्यम से इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए, और बीमा कवरेज को विस्तारित किया जाए।

यदि इन कदमों को अपनाया जाता है, तो यह न केवल पार्किंसन रोगियों के दैनिक कार्यों में सुधार करेगा, बल्कि भारत के स्वास्थ्य प्रणाली को एक अत्याधुनिक, कम‑आक्रामक तकनीक के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।