भिलवाड़ा और बंसवाड़ा के दो सरकारी अस्पतालों में पिछले सप्ताह आठ महिलाओं और एक नाबालिग की मौत ने राज्य सरकार को जांच का आदेश दिया। कुल 18 मातृ मौतों के साथ, राजस्थान में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की कड़ी जांच शुरू हो गई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भिलवाड़ा और बंसवाड़ा में 9 नई मातृ मौतें दर्ज
  • राज्य ने दो स्वतंत्र जांच समितियों को नियुक्त किया
  • मृत्युओं के कारण विभिन्न चिकित्सा जटिलताएँ, संक्रमण नहीं

राजस्थान के भिलवाड़ा और बंसवाड़ा जिलों के दो सरकारी अस्पतालों में पिछले सप्ताह कुल नौ मातृ मौतें हुईं, जिनमें आठ महिलाएँ और एक नाबालिग शामिल हैं। यह घटनाक्रम राज्य में पिछले दो महीनों में दर्ज 18 मातृ मौतों की संख्या को और बढ़ा देता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

घटनाओं का क्रम और प्रारंभिक कारण

भिलवाड़ा में पाँच और बंसवाड़ा में चार महिलाएँ मारी गईं। बंसवाड़ा में मृतकों की पहचान लाक्ष्मी (21), लीला (32), रेश्मा (28) तथा एक अनाम महिला के रूप में की गई है। मृत्यु 7 से 10 जुलाई के बीच हुई, जिसमें दो महिलाएँ सी‑सेक्शन के बाद और दो गंभीर स्थितियों में भर्ती होने के बाद निधन कर गईं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौर ने बताया कि प्रत्येक केस में अलग‑अलग कारण पाए गए, जैसे गैस्ट्रो‑शॉक, हृदयाघात, थ्रॉम्बोएम्बोलिज्म, पोस्ट‑पार्टम हैमरेज और HELLP सिंड्रोम।

सरकारी प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया

बंसवाड़ा में जिला कलेक्टर इंद्रजित यादव ने पाँच वरिष्ठ डॉक्टरों की समिति गठित की, जबकि भिलवाड़ा में भी दो स्तर की जांच – एक आंतरिक और एक स्वतंत्र – शुरू की गई। राजस्थान के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर ने कहा कि “सभी मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है” और निदान के लिए ऑपरेशन थिएटर के नमूने, एनेस्थीसिया रिपोर्ट और चिकित्सा इतिहास की जांच की जा रही है। उन्होंने ओटी संक्रमण को कारण मानने को “तथ्यात्मक रूप से गलत” कहा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और सामाजिक प्रभाव

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेह्लोत ने इस पर केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय की जांच की माँग की और राज्य सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा, “कोटा, बीकानेर, जोधपुर के बाद अब भिलवाड़ा में यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है” और सरकार को मातृ स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम राजस्थान के स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की कमियों को उजागर करता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन देखभाल और रक्तदान सेवाओं की कमी।

आगे की संभावनाएँ और राष्ट्रीय स्तर पर असर

यदि इन जांचों से प्रणालीगत त्रुटियाँ सामने आती हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा अतिरिक्त निधि और तकनीकी सहायता प्रदान की जा सकती है। साथ ही, WHO द्वारा मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट राज्य को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुधारात्मक कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है। इस प्रकार, यह मामला न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत में मातृ स्वास्थ्य नीति की दिशा को पुनः परिभाषित कर सकता है।