सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में रोगियों को फ़्लोर पर बिछाने की प्रथा को समाप्त करने की केरल सरकार की नई नीति को उरोलॉजी प्रमुख डॉ. हरिस चिरक्कल ने ‘मानवता के अनुरूप’ कहा। उन्होंने उपकरण की कमी से उत्पन्न समस्याओं के बाद अब दीर्घकालिक समाधान की भी मांग की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल सरकार ने अस्पतालों में फ़्लोर ट्रीटमेंट को समाप्त करने का कदम उठाया।
  • डॉ. हरिस चिरक्कल ने इस कदम की सराहना करते हुए दीर्घकालिक समाधान सुझाए।
  • भविष्य में विभागों का पुनर्विन्यास और नए मेडिकल कॉलेज की योजना पर चर्चा हुई।

केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने हाल ही में घोषणा की कि राज्य‑प्रबंधित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में रोगियों को बिस्तर की जगह फ़्लोर पर बिछाने की प्रथा को समाप्त किया जाएगा। यह कदम कई वर्षों से चल रहे भीड़भाड़ और बुनियादी सुविधाओं की कमी के जवाब में उठाया गया है।

डॉ. हरिस चिरक्कल की प्रतिक्रिया

त्रिवेंद्रम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के उरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. हरिस चिरक्कल, जिन्होंने पहले एलडीएफ सरकार के दौरान उपकरण की कमी और सर्जरी में देरी को उजागर करके राजनीतिक बहस को जन्म दिया था, ने इस नई पहल की “बहुत मानवीय” सराहना की। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “गंभीर रोगियों को बिस्तर के नीचे या गलियारे के कोनों में धकेलना अस्वीकार्य है। मंत्री को इस समस्या को सुलझाने के ठोस कदमों के लिए बधाई।”

पिछले विवाद और वर्तमान संदर्भ

डॉ. चिरक्कल ने 2025‑26 में अस्पताल में आवश्यक सर्जिकल उपकरणों की कमी, विशेषकर रोबोटिक सर्जरी और ट्रांसप्लांट सेट‑अप की कमी को उजागर किया था। उस समय कई सर्जरी रद्द या टाल दी गईं, जिससे रोगियों और उनके परिवारों में असंतोष बढ़ा। उनकी आवाज़ ने स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बनाया, परन्तु समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब इस नई नीति को वह एक ‘दीर्घकालिक समाधान की दिशा में पहला कदम’ मानते हैं।

दीर्घकालिक समाधान के प्रस्ताव

डॉ. चिरक्कल ने अस्पताल की भीड़भाड़ को कम करने के लिए दो प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए। पहला, त्रिवेंद्रम मेडिकल कॉलेज के कुछ विभागों को पुलयनारकोट्टा अस्पताल परिसर में स्थानांतरित करना, जहाँ जमीन की उपलब्धता अधिक है। दूसरा, थायकाड़ के जनरल अस्पताल और महिला‑बच्चा अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में बदलना, ताकि बुनियादी स्पेशलिटी देखभाल वहाँ हो सके और त्रिवेंद्रम मेडिकल कॉलेज अधिकतर सुपर‑स्पेशलिटी (कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, उरोलॉजी, ट्रांसप्लांटेशन और रोबोटिक सर्जरी) पर फोकस कर सके।

कार्यान्वयन और भविष्य की राह

मंत्री ने बताया कि फ़्लोर ट्रीटमेंट को खत्म करने के हिस्से के रूप में, त्रिवेंद्रम मेडिकल कॉलेज के फीवर क्लिनिक को पुलयनारकोट्टा चेस्ट डिसीज़ हॉस्पिटल में स्थानांतरित किया जाएगा, जहाँ लगभग 200 बिस्तर उपलब्ध कराए जाएंगे। कोझिकोड में भी सीएसआर फंड से एक नया ब्लॉक बनाकर भीड़भाड़ को घटाने की योजना है। डॉ. चिरक्कल ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेज़ी की मांग की, ताकि इन सुधारों को जल्द से जल्द लागू किया जा सके और सामान्य जनता को आधुनिक उपचार सुविधाएँ मिलें।