ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित बंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए चडऑक्स1 BDBV वैक्सीन 57 दिनों में फेज‑1 क्लिनिकल परीक्षण में प्रवेश कर चुका है। भारत के सीरम इंस्टिट्यूट ने दो हफ्तों में 620,000 डोज़ तैयार कर आपातकालीन उपयोग के लिए स्टॉक किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ऑक्सफ़ोर्ड‑सहयोगी ChAdOx1 BDBV वैक्सीन फेज‑1 में प्रवेश
  • सीरम इंस्टिट्यूट ने 620,000 डोज़ उत्पादन और 4,000 डोज़ परीक्षण के लिए आपूर्ति
  • वैक्सीन का विकास CEPI के $8.6 मिलियन सहयोग से तेज़ किया गया

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के वैक्सीन समूह और पैनडेमिक साइंसेज़ इंस्टीट्यूट ने बंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ एक नया वैक्सीन तैयार किया है, जो अभी‑ही घोषित ईबोला प्रकोप के 57 दिन बाद फेज‑1 क्लिनिकल परीक्षण में प्रवेश कर गया है। इस चरण में 18‑55 वर्ष के 50 स्वस्थ वयस्कों को वैक्सीन दी जाएगी ताकि सुरक्षा और इम्यून प्रतिक्रिया की जाँच की जा सके।

वैक्सीन का वैज्ञानिक आधार

ChAdOx1 BDBV वैक्सीन, चिम्पांजी एडेनोवायरस (ChAdOx) प्लेटफ़ॉर्म पर निर्मित है, वही तकनीक जो ऑक्सफ़ोर्ड‑एस्टराज़ेनेका कोवाइड‑19 वैक्सीन में उपयोग हुई थी। इस प्लेटफ़ॉर्म ने पहले साल में लगभग छह मिलियन लोगों की जान बचाई है, जिससे इस नई वैक्सीन की संभावनाओं पर भरोसा बढ़ता है।

सीरम इंस्टिट्यूट की भूमिका

भारत स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (SII) ने इस परियोजना को गति देने में निर्णायक योगदान दिया। केवल दो हफ्तों में 620,000 डोज़ का उत्पादन किया और फेज‑1 परीक्षण के लिए 4,000 डोज़ आपूर्ति की। एडर पूनावल्ला, SII के सीईओ ने कहा, “प्रकोप के समय तेज़ी, तैयारियों और वैश्विक सहयोग से ही वैक्सीन को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।”

वैश्विक सहयोग और आगे की योजना

CEPI (कोएलिशन फॉर इपिडेमिक प्रिपेरेडनेस इनोवेशन्स) ने इस वैक्सीन को $8.6 मिलियन के फंड से समर्थन किया और ऑक्सफ़ोर्ड तथा SII के साथ मिलकर विकास को तेज़ किया। नियामक मंजूरी मिलने पर, उगांडा में अतिरिक्त क्लिनिकल अध्ययन शुरू करने की तैयारी भी चल रही है, जिसमें मेडिकल रिसर्च काउंसिल/उगांडा वायरस रिसर्च इंस्टीट्यूट और लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन व ट्रॉपिकल मेडिसिन के सहयोगी यूनिट शामिल होंगे।

प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ

बंडिबुग्यो ईबोला प्रकोप अब तक के तीसरे सबसे बड़े ईबोला प्रकोप के रूप में दर्ज है, जिसमें मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वैक्सीन की शीघ्र उपलब्धता संभावित आपातकालीन स्थितियों में जीवन बचाने, स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ कम करने और समुदायों की सुरक्षा में प्रमुख भूमिका निभा सकती है।