भारत में मेडिकल टूरिज्म में अभूतपूर्व उछाल आया है, जहां विदेशी मरीजों की संख्या 2020 में 1.83 लाख से बढ़कर 2023 में 6.59 लाख हो गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत में मेडिकल पर्यटकों की संख्या 2020 में 1.83 लाख से बढ़कर 2023 में 6.59 लाख हो गई है।
- भारतीय मेडिकल टूरिज्म इंडस्ट्री के 2026 तक 12.32 अरब डॉलर (लगभग ₹1 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है।
- विदेशी मरीज केवल कम लागत के लिए नहीं, बल्कि कुशल डॉक्टरों, आधुनिक तकनीक और तत्काल उपचार के लिए भारत आ रहे हैं।
भारत का चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) उद्योग वर्तमान में एक स्वर्णिम युग से गुजर रहा है। यह क्षेत्र देश के समग्र पर्यटन क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां केवल 1.83 लाख मेडिकल पर्यटक भारत आए थे, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 6.59 लाख हो गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2026 तक भारत का चिकित्सा पर्यटन उद्योग 12.32 अरब डॉलर का विशाल बाजार बन जाएगा।
केवल कम लागत ही नहीं, गुणवत्ता भी है मुख्य आकर्षण
आमतौर पर यह माना जाता है कि विदेशी मरीज केवल कम खर्च के कारण भारत का रुख करते हैं। हालांकि, लागत प्रभावशीलता एक बड़ा कारक जरूर है—जहां अमेरिका या ब्रिटेन की तुलना में भारत में इलाज का खर्च 60 से 80 प्रतिशत तक कम होता है—लेकिन अब यह एकमात्र वजह नहीं रह गई है। आज वैश्विक मरीज भारत के जेसीआई (JCI) प्रमाणित अस्पतालों, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित डॉक्टरों की विशेषज्ञता पर भरोसा कर रहे हैं। पश्चिमी देशों में जहां मरीजों को सर्जरी के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ता है, वहीं भारत में शून्य प्रतीक्षा समय (Zero Waiting Time) एक बड़ा वरदान साबित हो रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं
भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान जैसे अपोलो, फोर्टिस, और मेदांता अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं। इनमें रोबोटिक सर्जरी, कैंसर के लिए प्रोटॉन बीम थेरेपी, जटिल कार्डियोवैस्कुलर सर्जरी और अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल हैं। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगर वैश्विक चिकित्सा के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। इन शहरों में मिलने वाली प्रीमियम केयर और अंग्रेजी बोलने वाले सहायक स्टाफ के कारण पश्चिमी देशों के मरीजों को यहां घरेलू माहौल जैसा अनुभव मिलता है।
आयुष (AYUSH) और पारंपरिक चिकित्सा का अनूठा संगम
भारत की एक और बड़ी यूएसपी (USP) आधुनिक एलोपैथी के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) का सफल समन्वय है। विदेशी मरीज अब केवल शल्य चिकित्सा के लिए ही नहीं, बल्कि पुरानी बीमारियों के स्थायी इलाज और मानसिक शांति के लिए भी भारत आ रहे हैं। केरल और उत्तराखंड जैसे राज्य वेलनेस टूरिज्म (Wellness Tourism) के वैश्विक केंद्र बन चुके हैं, जो मरीजों को एक समग्र (Holistic) उपचार प्रदान करते हैं।
सरकारी पहल और सुगम वीजा नीतियां
भारत सरकार ने इस क्षेत्र की क्षमता को पहचानते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की 'हील इन इंडिया' (Heal in India) पहल ने भारतीय स्वास्थ्य सेवा को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित किया है। इसके अलावा, विदेशी मरीजों के लिए विशेष 'मेडिकल वीजा' और 'ई-मेडिकल वीजा' की व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने की प्रक्रिया बेहद सरल और त्वरित हो गई है। यही कारण है कि भारत आज वैश्विक स्वास्थ्य सेवा का नया सिरमौर बनने की राह पर अग्रसर है।