विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि कांगो के पूर्वी भाग में इबोला का प्रकोप प्रतिक्रिया से तेज़ी से फैल रहा है। नई रिपोर्टों में बताया गया है कि 80% मामलों के संपर्क नहीं पता चल पा रहे हैं, जिससे नियंत्रण मुश्किल हो रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नई 80% इबोला केस बिना संपर्क के पहचान में आ रहे हैं।
  • वेस्टर्न कांगो में उपचार एवं परीक्षण सुविधाएँ बढ़ी हैं, पर प्रतिक्रिया गति से पीछे है।
  • सुरक्षा, निधि कमी और स्थानीय असंतोष प्रतिक्रिया को बाधित कर रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन प्रमुख चिकवे इहेकवेआजु ने 14 जुलाई को बुनिया, इटुरी प्रांत में की गई यात्रा के बाद कहा कि इबोला प्रकोप अभी भी प्रतिक्रिया से तेज़ी से फैल रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में स्थिति में सुधार दिख रहा है, पर कई नए संक्रमण अज्ञात संचरण श्रृंखलाओं से उत्पन्न हो रहे हैं।

प्रकोप की वर्तमान स्थिति

अभी तक कांगो के तीन प्रांतों में 1,926 लोग संक्रमित हुए हैं और 702 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। यह दुर्लभ बुंडिबुज्यो वायरस है, जिसके लिए अभी तक कोई मान्य टीका या उपचार नहीं मिला है। पड़ोसी युगांडा में भी मामलों की पुष्टि हुई है, जिससे क्षेत्रीय खतरा बढ़ गया है।

उपचार एवं परीक्षण में विस्तार

बुनिया में उपचार क्षमता अब लगभग 800 बिस्तरों तक पहुंच गई है और हर सप्ताह अतिरिक्त बिस्तर जोड़ने की योजना है। प्रयोगशालाओं की संख्या एक से बढ़कर 14 कर दी गई है, जिससे रोग का शीघ्र पता लगाना संभव हो रहा है। फिर भी, इहेकवेआजु ने कहा कि “हमारी पूरी कोशिशों के बावजूद हम अभी तक तेज़ी से बढ़ते प्रकोप के साथ ताल नहीं मिला पाए हैं।”

विरोधी कारक और चुनौतियाँ

वित्तीय अंतर, स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले, पूर्वी कांगो में चलती लड़ाइयाँ और स्थानीय समुदायों का विश्वासघात इस प्रकोप को नियंत्रित करने में प्रमुख बाधाएं बनें हुए हैं। हाल ही में उत्तरपूर्व कांगो के एक उपचार केंद्र में कर्मचारियों ने वेतन व बोनस न मिलने के कारण हड़ताल कर दी, जिससे रोगी देखभाल में और व्यवधान आया।

भविष्य की दिशा

डिज़ाइन किए गए क्लिनिकल ट्रायल्स ने इस वायरस के खिलाफ नई दवाओं की खोज को तेज किया है, पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। यू.एस. के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) ने बताया कि एक अमेरिकी नागरिक, जो कांगो में मानवीय कार्य कर रहे थे, इबोला पॉज़िटिव पाए गए हैं, पर विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। इस परिप्रेक्ष्य में, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्थानीय भरोसे को बढ़ाना ही इस प्रकोप को काबू करने का मुख्य मार्ग होगा।