डॉ. पी. विजया ने 3,500 सदस्यों और 95 देशों की वैश्विक मतदान प्रक्रिया में जीत हासिल कर वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन (WSO) के 18 निदेशक पदों में से एक पर कब्जा किया। वह 2026‑2030 तक चार साल के कार्यकाल के लिए प्रतिनिधित्व करेंगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- डॉ. पी. विजया को WSO बोर्ड में चुना गया
- वह एशिया‑ओशिनिया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगी
- 2026‑2030 तक चार साल का कार्यकाल
डॉ. पी. विजया, गुंटुर स्थित ललिता पीवीएस इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ के अनकीनीडू एडवांस्ड स्ट्रोक सेंटर की निदेशक, विश्व स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन (WSO) के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में चुनी गईं। यह चयन 3,500 सदस्यों और 95 देशों के व्यापक मतदान के बाद हुआ, जिसमें कुल 18 निदेशक पद उपलब्ध थे।
पृष्ठभूमि और महत्व
विश्व स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन एक अंतरराष्ट्रीय मंच है जिसका उद्देश्य स्ट्रोक की रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और शोध को सुदृढ़ बनाना है। एशिया‑ओशिनिया क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. विजया का चयन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत के स्ट्रोक देखभाल में उन्नति का प्रतीक भी है। इस क्षेत्र में स्ट्रोक की बढ़ती दर और सीमित संसाधनों को देखते हुए, उनके अनुभव और पहलें वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
डॉ. विजया के प्रमुख योगदान
डॉ. विजया ने क्लिनिकल स्ट्रोक देखभाल, शोध, चिकित्सा शिक्षा, सार्वजनिक जागरूकता और वकालत में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुतियां दीं, तथा स्ट्रोक रोगियों के पुनर्वास के लिए नवीन प्रोटोकॉल विकसित किए। उनके कार्यों ने भारत में स्ट्रोक मृत्यु दर को घटाने में मदद की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनका सम्मान करता है।
भविष्य की भूमिका और अपेक्षित प्रभाव
2026 से 2030 तक चार साल के कार्यकाल के दौरान, डॉ. विजया बोर्ड के सदस्य के रूप में वैश्विक दृष्टिकोण और नीतियों को आकार देने में मदद करेंगी। वे अंतरराष्ट्रीय स्ट्रोक दिशानिर्देशों के निर्माण, शैक्षिक पहल, और विभिन्न राष्ट्रीय स्ट्रोक सोसाइटीज़ के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार होंगी। उनका पहला बोर्ड मीटिंग अक्टूबर में सियोल, दक्षिण कोरिया में आयोजित होगा, जहाँ वे एशिया‑ओशिनिया के हितों को उजागर करेंगी।
भारत और विश्व के लिए निहितार्थ
डॉ. विजया का चयन भारतीय न्यूरोलॉजी और स्ट्रोक देखभाल के वैश्विक मानचित्र पर नई दिशा स्थापित करता है। यह अन्य भारतीय चिकित्सकों को भी अंतरराष्ट्रीय मंचों में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे ज्ञान का आदान‑प्रदान और सहयोगी शोध को बढ़ावा मिलेगा। अंततः, यह भारत के स्वास्थ्य प्रणाली को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।