महाराष्ट्र सरकार ने सभी शहरी निकायों को निर्देश दिया कि वे बंध्य, टीकाकृत आवारा कुत्तों को स्कूल, अस्पताल, हवाई अड्डे और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों के पास न छोड़ें और विशेष फ़ीडिंग ज़ोन व हेल्पलाइन स्थापित करें।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • स्नातक विद्यालय, अस्पताल, हवाई अड्डे आदि में बंध्य कुत्ते न छोड़ें
  • कुत्तों को बाँझ, टीकाकृत कर सुरक्षित शेल्टर में रखें
  • रैबिड, घातक या अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को विशेषज्ञ सलाह पर ही मार दिया जा सकता है

महाराष्ट्र सरकार ने शहरी विकास विभाग के माध्यम से एक नई सरकारी रिज़ॉल्यूशन (GR) जारी की, जिसमें सभी नगरपालिका निगम, परिषद और नगर पंचायतों को आवारा कुत्तों की रोकथाम के दिशा‑निर्देश सख्ती से लागू करने का आदेश दिया गया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के सतत‑सुवो‑मोटु (suo motu) कार्यवाही में कुत्ते नियंत्रण के संबंध में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है।

आदेश का मुख्य उद्देश्य

इस आदेश के तहत शहरी निकायों को कुत्तों को बाँझ (sterilisation), टीकाकरण (vaccination) और डिवॉर्मिंग (deworming) के लिए पकड़ने, उन्हें सुरक्षित शेल्टर में स्थानांतरित करने और विशेष फ़ीडिंग ज़ोन स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, स्कूल, अस्पताल, हवाई अड्डे, बस‑स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसर जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों पर इन कुत्तों को फिर से नहीं छोड़ा जाएगा।

कानूनी और स्वास्थ्य पहलू

आदेश में कहा गया है कि रैबिड, टर्मिनली बीमार या अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को पशु‑विशेषज्ञों की सलाह पर ही “euthanise” किया जा सकता है, जो 1960 के ‘Prevention of Cruelty to Animals Act’ और 2023 के ‘Animal Birth Control Rules’ के अनुरूप होगा। साथ ही, सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में एंटी‑रैबिस वैक्सीन व इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि कुत्ते के काटने के मामलों का तुरंत उपचार हो सके।

प्रभाव और भविष्य की दिशा

यह कदम महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने, सार्वजनिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य ने मौजूदा बाँझीकरण एवं टीकाकरण केंद्रों को सुदृढ़ करने, नई सुविधाएँ बनाने और प्रशिक्षित कर्मियों की संख्या बढ़ाने का भी आदेश दिया है। यदि कोई अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करता है, तो उसे contempt of court के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

समुदाय की प्रतिक्रिया

पशु प्रेमियों के कुछ वर्गों ने इस आदेश को लेकर बहस शुरू कर दी है, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष इस दिशा में किए गए निर्णय को बरकरार रखा है, यह कहकर कि “गौरवपूर्ण जीवन का अधिकार” कुत्तों को भी बिना भय के चलने का अधिकार देता है। इस बीच, सरकार ने उन अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की है जो अच्छे इरादे से आदेश लागू कर रहे हैं, बशर्ते वे दुरुपयोग या मन‑मुटाव के सबूत न प्रस्तुत हों।