पाकिस्तान की सुरक्षा बलों ने बैलाचिस्तान में हुए तीन बड़े हमलों के जवाब में 54 मिलिशिया को मारते हुए 38 सुरक्षा कर्मियों की शहादत का सामना किया। इस कार्रवाई को सीमापार नेटवर्क और भारत के समर्थन का आरोप लगाते हुए जारी किया गया।
पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को बताया कि बैलाचिस्तान में पिछले चार दिनों में हुए समन्वित हमलों के बाद सुरक्षा बलों ने 54 मिलिशिया को मारते हुए 38 सुरक्षा कर्मियों को खो दिया। इस बयान को अंतर-सेवा सार्वजनिक संबंध (ISPR) के मुख्य जनरल लैटिनेंट जनरल अहमद शरिफ़ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दिया।
हिंसा के प्रमुख झटके
पहला हमला ज़ियारत में एक पुलिस चेकपॉइंट पर हुआ, जहाँ अधिकारियों ने प्रतिरोध कर 15 मिलिशिया को मार गिराया। दूसरा हमला 6 जुलाई को मंगी डैम पर किया गया, जो क्वेटा के लिए प्रमुख जल स्रोत है; सुरक्षा बलों ने तुरंत क्षेत्र को सुरक्षित कर हमलावरों को नष्ट कर दिया। इसी क्रम में खरान में 6 और डालबंदिन में 8 मिलिशिया को अलग‑अलग ऑपरेशन में मार डाला गया।
सड़क पर बड़ा ऑपरेशन
सबसे बड़ा मुकाबला N‑25 हाईवे पर हुआ, जहाँ मिलिशिया ने यात्रियों से रिश्वत ले कर मार्ग रोक रखा था। गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने तेज़ी से कार्रवाई की और 19 मिलिशिया को नष्ट कर दिया। इस ऑपरेशन में 11 सैनिक भी शहीद हुए, जो इस संघर्ष के मानवीय लागत को उजागर करता है।
सीमापार आरोप और राजनीतिक पहलू
पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने बताया कि कई हमलावर अफगान राष्ट्रीय थे और उनका समर्थन अफगान तालिबान सरकार से जुड़ा है। इसी समय, उन्होंने भारत पर बैलाचिस्तान में मिलिशिया को समर्थन देने का भी आरोप लगाया, जिसे भारत ने बार‑बार खारिज कर दिया है। ये आरोप क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकते हैं, विशेषकर जब दोनों देशों के बीच पहले से ही सीमापार सुरक्षा मुद्दे हैं।
बैलाचिस्तान का रणनीतिक महत्व
बैलाचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत, दशकों से अलगाववादी, इस्लामिक और राष्ट्रीयवादी मिलिशिया के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। इसके खनिज संसाधन, ग्वादर पोर्ट के माध्यम से अरब सागर तक पहुँच, और ईरान‑अफ़गान सीमा के निकटता इसे रणनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाती है। इस कारण, प्रदेश में स्थिरता न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण‑एशिया की सुरक्षा परिस्थितियों को प्रभावित करती है।
भविष्य की दिशा
सुरक्षा बलों की त्वरित प्रतिक्रिया ने बड़े पैमाने पर हमले को रोका, परन्तु मिलिशिया की निरंतर मौजूदगी और सीमापार नेटवर्क की जटिलता को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान के लिए राजनीतिक संवाद, आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशन आवश्यक है।