लॉरेंस बिश्नोई गैंग को दो साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी सूची में डाल दिया गया है। कैनेडियन पुलिस ने इसे प्रोहालिस्टान कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाला बताया, जबकि अमेरिकी एफबीआई ने ऑपरेशन हार्ड बॉल में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कहानी भारत‑कनाडा‑अमेरिका के बीच बढ़ते सुरक्षा तनाव को उजागर करती है।
पृष्ठभूमि
लॉरेंस बिश्नोई, जो पहले भारत की सख्त उपनिवेशीय अपराधियों की सूची में था, को 2024 में ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा में कई आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा गया। बिश्नोई के सहयोगी सतिंदरजीत सिंह (गोल्डी बर) को भी उसी समूह का हिस्सा माना जाता है, और दोनों पर extortion, हत्या, और आगजनी के मामले में आरोप लगे।
कनाडा की कार्रवाई
14 अक्टूबर 2024 को रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने बिश्नोई समूह को सार्वजनिक रूप से पहचान कर, इसे प्रोहालिस्टान कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाले नेटवर्क के रूप में वर्णित किया। इस बयान ने 2023 में हर्दीप सिंह निज़्ज़र की हत्या के बाद भारत‑कनाडा संबंधों को और बिगाड़ दिया था।
2025 में, ब्रिटिश कोलंबिया में दक्षिण एशियाई व्यापारियों पर लगातार बढ़ते extortion के कारण, प्रांतीय प्रधानमंत्री डेविड एबी ने समूह को आतंकवादी घोषित करने की मांग की। अगस्त 2025 में एबॉट्सफ़र्ड पुलिस को बिश्नोई गैंग से आया एक पत्र मिला, जिसमें 1,000 ‘फुट सोल्जर्स’ का दावा था, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देता था।
अमेरिकी अभियोजन
सितंबर 2025 में, कैनेडा ने बिश्नोई गैंग को अपने क्रिमिनल कोड के तहत आधिकारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित किया। इस निर्णय के बाद अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने “ऑपरेशन हार्ड बॉल” शुरू किया, जिसमें बिश्नोई और गोल्डी बर को कई गंभीर अपराधों के लिए अमेरिकी न्यायालय में अभियोजन का सामना करना पड़ा।
एफबीआई के दस्तावेज़ों में बताया गया कि बिश्नोई ने खुद एक कैनेडियन पीड़ित को संपर्क किया, जिसके वाहन पर उसके घर के पास गोली चलाने की योजना थी। इसके अलावा, एक कालीमेलर ने बिश्नोई के आदेश पर भारत में अपनी परिवार को धमकी दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुप्तचर सहयोग की जटिलता स्पष्ट हुई।
परिणाम और भविष्य की दिशा
बिश्नोई गैंग को आतंकवादी घोषित करने से भारत, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच कानून प्रवर्तन सहयोग में नई गति मिली है। यह कदम दक्षिण एशियाई व्यवसायियों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही वैध प्रवासन प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नेटवर्क को पूरी तरह से नष्ट नहीं किया गया तो यह अन्य आपराधिक संगठनों के लिए मॉडल बन सकता है।
भविष्य में, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को बिश्नोई जैसे समूहों की वित्तीय धारा, डिजिटल संचार और ग्राउंड ऑपरेशनों पर अधिक बारीकी से नजर रखनी होगी, ताकि ऐसी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक शृंखलाओं को जड़ से खत्म किया जा सके।