प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारत‑ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के साथ-साथ CEOs फोरम को संबोधित किया। इस दौरे में रक्षा, व्यापार, शिक्षा और प्रवासन सहित कई क्षेत्रों में नई पहलों की घोषणा की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 जुलाई को अपने तीन‑देशीय दौरे के दूसरे चरण में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंचे। यहाँ उन्होंने ऑस्ट्रेलिया‑भारत वार्षिक शिखर सम्मेलन के साथ-साथ India‑Australia CEOs Forum को संबोधित किया, जहाँ दो देशों के व्यापारिक, औद्योगिक और निवेश संबंधों को गहरा करने की बात रखी गई।

पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व

भारत‑ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) 2020 में स्थापित हुई थी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा, ऊर्जा, विज्ञान‑प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करना है। पिछले दो शिखर सम्मेलनों में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस वर्ष का शिखर, जो पहले से ही द्विपक्षीय वार्ता का मंच बन चुका है, इसे नई ऊर्जा और निवेश अवसरों के लिए एक उत्प्रेरक माना जा रहा है।

सत्र के प्रमुख एजेंडा

मॉडि के प्रवास के दौरान कई मुख्य बिंदु सामने आए:

  • रक्षा एवं सुरक्षा: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा समझौते को विस्तारित करने, संयुक्त समुद्री अभ्यासों को बढ़ाने और साइबर सुरक्षा सहयोग को गहरा करने की योजना बनाई गई।
  • व्यापार व निवेश: दो देशों के बीच वार्षिक व्यापार को $30 बिलियन से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया, विशेषकर तकनीकी, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में।
  • शिक्षा एवं प्रवासन: छात्रों के लिए द्विपक्षीय स्कॉलरशिप, वर्क वीज़ा प्रक्रिया को सरल बनाने और योग्य कुशल कार्यकर्ताओं के प्रवासन को प्रोत्साहित करने की पहल पर चर्चा हुई।

CEO फोरम का विशेष महत्व

CEO फोरम में 150 से अधिक उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक नेताओं ने भाग लिया। मंच पर भारतीय कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया में विस्तार के लिए नई रणनीतियों का खुलासा किया, जबकि ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों ने भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए सहयोगी मॉडल प्रस्तुत किए। इस फोरम ने दो देशों की आर्थिक जुड़ाव को स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप पेश किया।

भविष्य की संभावनाएँ

मॉडि की इस यात्रा से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत‑ऑस्ट्रेलिया संबंध केवल राजनैतिक स्तर पर नहीं, बल्कि व्यावसायिक, तकनीकी और सामाजिक स्तर पर भी गहरा हो रहा है। भारतीय प्रवासी समुदाय की सक्रिय भागीदारी, दोनों देशों के युवा उद्यमियों के बीच सहयोग और सामुदायिक स्तर पर बढ़ते सांस्कृतिक आदान‑प्रदान को देखते हुए, इस साझेदारी का दीर्घकालिक प्रभाव व्यापक होगा।

समग्र रूप से, इस दौरे ने दोनों देशों को वैश्विक आर्थिक बदलावों और सुरक्षा चुनौतियों के बीच एक मजबूत गठबंधन बनाने का अवसर प्रदान किया है।