अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है और इस पर अमेरिकी बलों ने ईरानी वायु रक्षा और रडार पर प्रहार किया। ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्षित करने के लिए ड्रोन व मिसाइल हमला किया, जिससे क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बुधवार को कहा कि ईरान उनके हत्या की योजना बना रहा है, और उन्होंने खुद को "उनकी सूची में हर एक नाम" बताया। यह बयान एंकरा में आयोजित इस साल के नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया को दिया गया, जहाँ ट्रम्प ने ईरान के साथ मौजूदा समझौते को समाप्त कर दिया है।
अमेरिकी प्रहार का कारण
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी बलों ने मंगलवार रात ईरान के विरुद्ध एक नई लहर में प्रहार किया। इस कार्रवाई का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में नागरिक जहाजों को निशाना बनाने वाले ईरानी हमलों को रोकना और "भारी कीमत" लगाना था। प्रहार में ईरानी वायु रक्षा प्रणाली, रडार इंस्टॉलेशन और इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड (IRGC) के 60 से अधिक छोटे जलयान शामिल थे।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने तुरंत प्रतिशोध में ड्रोन और मिसाइलों से बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्षित किया। दोनों देशों ने सुबह ही मिसाइल अलर्ट जारी किया। कुवैत ने बताया कि उसने दो बैलिस्टिक मिसाइल और 13 ड्रोन को रोक लिया, जबकि कुछ पावर लाइनें गिरते मलबे से क्षतिग्रस्त हुईं।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हाल ही में कई बार ईरान‑अमेरिका टकराव हुआ है। पिछले महीने भी ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी बलों ने प्रतिशोधी हवाई हमले किए थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव की लहर फिर से उठी। इस जलडमरूमध्य को विश्व की सबसे महत्त्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, जहाँ से हर दिन लाखों बैरल तेल गुजरता है।
भविष्य की संभावनाएँ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के क्रमिक प्रहारों से क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की संभावना बढ़ रही है। नाटो सदस्य देशों ने स्थिति पर "सावधानीपूर्वक" नजर रखने की बात कही है, जबकि ईरान ने कहा कि वह "सभी अमेरिकी हितों को नष्ट करने" के लिए तैयार है। इस बीच, चीन और रूस जैसी महाशक्तियों ने कूटनीतिक संवाद के माध्यम से तनाव को कम करने का आह्वान किया है।
यदि इस संघर्ष को कूटनीतिक समाधान नहीं मिला, तो वैश्विक तेल कीमतों में उछाल, समुद्री व्यापार में व्यवधान और मध्य पूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल संवाद स्थापित कर शांति के रास्ते खोजने की आवश्यकता है।