अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि पंजाब के गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई ने 2025‑2026 में गुजरात के साबरमती जेल से व्हाट्सएप और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स का प्रयोग कर अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की वसूली की कोशिश की। यह आरोप राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के 2022 के चार्जशीट के साथ मिलते‑जुलते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DoJ) ने 8 जुलाई 2026 को एक विस्तृत बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि पंजाब‑जन्मे गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई ने गुजरात के साबरमती जेल में बंद रहते हुए व्हाट्सएप, सिग्नल और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से अमेरिकी शहरों लॉस एंजिल्स और थाउज़ंड ओक्स के शिकारों से लगभग पाँच मिलियन डॉलर तक की वसूली करने की कोशिश की।

US DOJ की आरोप

DoJ ने बिश्नोई और उनके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह (उपनाम गोल्डी ब्रार) को न केवल extortion, बल्कि प्रॉ‑खालिस्तान कार्यकर्ता हारदीप सिंह निज़्ज़र की हत्या का आदेश देने का भी आरोप लगाया। एजेंसी ने कहा कि बिश्नोई का “संगठन लगातार धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं को हिंसा के माध्यम से डराता और शोषण करता रहा”।

जेल में संचार साधन

जेल प्रशासन का कहना है कि बिश्नोई को 2023 से सिंगल सेल में रखा गया है और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में है। फिर भी DoJ ने दावा किया कि बिश्नोई ने “कॉन्ट्राबैंड मोबाइल फोन और वॉयस‑ओवर‑इंटरनेट‑प्रोटोकॉल (VoIP) डिवाइस” जेल में लाकर अपने आपराधिक नेटवर्क को निर्देशित किया। इन उपकरणों से वह न केवल extortion, बल्कि हत्या, अपहरण, ड्रग ट्रैफ़िकिंग और मानव तस्करी जैसे कई अंतरराष्ट्रीय अपराधों का संचालन करता रहा।

NIA की 2022 की चार्जशीट से तालमेल

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 2022 में बिश्नोई और कई सहयोगियों के खिलाफ 84 मामलों की सूची पेश की थी, जिसमें दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान और पंजाब में विभिन्न आपराधिक मामलों का उल्लेख है। वही चार्जशीट बिश्नोई के “जेल के भीतर से पूरे गैंग का संचालन” करने के दावे को दोहराती है। यह भी कहा गया कि बिश्नोई ने 2010 से शुरू होकर कई हाई‑प्रोफ़ाइल हमलों, जैसे 2023 में वैंकूवर में भारतीय अभिनेता के घर पर गोलीबारी, को अंजाम दिया।

वकील की प्रतिक्रिया

बिश्नोई की वकील, राजनी खत्री ने कहा कि अपने मुवक्किल को निरंतर निगरानी में रखा गया है और जेल में बाहर निकलने की कोई अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा, “यदि बिश्नोई व्हाट्सएप का प्रयोग कर रहा है, तो अधिकारियों को ठोस सबूत पेश करने चाहिए। वह केवल अपने कानूनी प्रतिनिधियों से ही मिलते‑जुलते हैं।” खत्री ने यह भी उजागर किया कि बिश्नोई को 40 मामलों से छूट या बरी किया गया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्यों वह कई मामलों में बंधक नहीं हो पाया।

राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

बिश्नोई के खिलाफ अमेरिकी आरोप न केवल भारत‑अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं, बल्कि खालिस्तान‑समर्थक संगठनों के वित्तीय प्रवाह को भी उजागर करते हैं। NIA ने बताया कि बिश्नोई की वसूली से प्राप्त धनराशि को कनाडा, दुबई, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भेजा जाता है, जहाँ से वह “प्रो‑खालिस्तान उग्रवादी” को समर्थन देता है। यह तथ्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी को और कठोर बना सकता है।

अंततः, इस मामले में भारतीय जेल प्रशासन, NIA, और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच सहयोग और सूचना‑साझाकरण की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है। यदि बिश्नोई ने वास्तव में जेल में ही अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क को नियंत्रित किया, तो यह भारत के कारावास प्रणाली में तकनीकी सुरक्षा के बड़े अंतर को भी उजागर करता है।