तुर्की राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर और कनाडाई पीएम मार्क कार्नी को व्यक्तिगत रूप से नक्काशीदार पिस्तौल भेंट कीं।

अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान कूटनीति के एक बेहद असामान्य और चौंकाने वाले अध्याय का उदय हुआ है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने गठबंधन के प्रमुख नेताओं को व्यक्तिगत रूप से नक्काशीदार रिवॉल्वर और पिस्तौल भेंट कीं, जो कि अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के लिहाज से एक दुर्लभ घटना है। इन उपहारों में न केवल सुंदर नक्काशी शामिल थी, बल्कि इनके साथ लाइव गोला-बारूद भी दिया गया था।

कूटनीतिक उपहार और कानूनी पेच

इन विशेष उपहारों में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी प्रमुख रूप से शामिल रहे। हालांकि, ये उपहार अपने साथ कई कानूनी चुनौतियां भी लेकर आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के सख्त हथियार नियंत्रण कानूनों के कारण इन पिस्तौलों को उनके गृह देशों में ले जाने से पहले 'निष्क्रिय' (decommissioned) करना अनिवार्य होगा।

कनाडा के वैश्विक मामलों के विभाग ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री कार्नी की पिस्तौल को रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) को सौंप दिया जाएगा ताकि इसे सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किया जा सके। संभावना है कि भविष्य में इसे किसी कनाडाई संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाए। इसी तरह, कीर स्टारमर की रिवॉल्वर को भी ब्रिटेन लाने से पहले तकनीकी रूप से चलाने में असमर्थ बना दिया जाएगा।

बदलते भू-राजनीतिक समीकरण

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब नाटो सदस्य यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं। एर्दोगन का यह कदम केवल एक उपहार नहीं, बल्कि तुर्की की बढ़ती वैश्विक शक्ति और गठबंधन के भीतर उसकी महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत भी माना जा रहा है। शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री स्टारमर ने एर्दोगन के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा सहयोग को बढ़ाना है।

निष्कर्ष और प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि एर्दोगन की यह 'हथियार कूटनीति' गठबंधन के भीतर तुर्की के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। जहां एक ओर यह उपहार व्यक्तिगत संबंधों को प्रगाढ़ करने का प्रतीक हो सकता है, वहीं दूसरी ओर यह सुरक्षा और प्रोटोकॉल के दृष्टिकोण से चर्चा का विषय बना हुआ है।