मिलबर्न में आयोजित भारत‑ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला‑विचलन और ऊर्जा संकट के समय में विश्वसनीय साझेदारियों के महत्व को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़े के साथ भारत‑ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में भाग लिया। यह कार्यक्रम उनके तीन‑देशीय दौरे (इंडोनेशिया‑ऑस्ट्रेलिया‑न्यूज़ीलैंड) का दूसरा चरण था, जिसका मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक संबंधों को गहरा करना था।

भूराजनीतिक पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा‑सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और उच्च तकनीक क्षेत्रों में कई समझौते किए हैं। 2020 में दो देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसके बाद संयुक्त सैन्य अभ्यास, क्वाड (Quadrilateral Security Dialogue) में सहयोग और साइबर सुरक्षा समझौते की प्रगति हुई। आज, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला‑विचलन और ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता के कारण, दोनों देशों के लिए एक-दूसरे को भरोसेमंद सहयोगी के रूप में देखना अनिवार्य हो गया है।

सांस्कृतिक कूटनीति का महत्व

मिलबर्न में भारतीय प्रवासी समुदाय ने एक रंगीन स्वागत समारोह आयोजित किया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया‑भारत ऑर्केस्ट्रा द्वारा “माँ तुझे सलाम” का प्रस्तुतीकरण प्रमुख आकर्षण रहा। पीएम मोदी ने इसे “शानदार” कहा और कहा कि संगीत दो राष्ट्रों के लोगों के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है। इस शाम में ऑस्ट्रेलिया के पारंपरिक डिडजेरिडू और भारतीय तबला का मिश्रण, तथा काठक नृत्य का प्रदर्शन भी दिखाया गया, जिससे सांस्कृतिक आदान‑प्रदान की गहराई स्पष्ट हुई।

व्यापार‑और‑प्रौद्योगिकी सहयोग के आयाम

फोरम में दोनों पक्षों ने रक्षा, शिक्षा, लोगों की गतिशीलता, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, खेल और निवेश जैसे क्षेत्रों में विस्तृत चर्चा की। विशेष रूप से क्वाड‑फ़्रेमवर्क के तहत समुद्री सुरक्षा और साइबर रक्षा के लिए संयुक्त कार्य योजनाओं पर सहमति बनी। व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक दो‑तरफ़ा व्यापार को $30 बिलियन से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें खनिज, ऊर्जा, कृषि और डिजिटल सेवाओं को प्रमुख स्तंभ माना गया है।

आगामी कदम

ऑस्ट्रेलिया में अपने दो‑दिन के दौरे के बाद, पीएम मोदी न्यूज़ीलैंड की ओर रुख करेंगे, जहाँ भी भारत‑न्यूज़ीलैंड रणनीतिक संवाद को सुदृढ़ करने की योजना है। इस दौर का समग्र उद्देश्य भारत को इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करना है, जिससे वैश्विक अस्थिरता के बीच आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा बनी रहे।