ऑस्ट्रेलिया में सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौते करने के बाद, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूज़ीलैंड के लिए रवाना हुए। दो दिवसीय यात्रा में आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को गहरा करने की योजना है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत‑ऑस्ट्रेलिया सिविल परमाणु ऊर्जा समझौता अंतिम रूप से साइन किया गया
- न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर सहयोग को तेज़ किया जाएगा
- इंडो‑पैसिफिक में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने हेतु तीन‑देशीय दौरा जारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जुलाई को मेलबर्न से प्रस्थान करके ऑस्ट्रेलिया में तीन‑दिन की सफल यात्रा के बाद न्यूज़ीलैंड के ऑकलैंड का मार्ग पकड़ा। ऑस्ट्रेलिया में सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर कई समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद, द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। यह दौरा भारत‑ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के साथ‑साथ इंडो‑पैसिफिक में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है।
ऑस्ट्रेलिया में सिविल परमाणु समझौता
दो‑वर्षों के कठिन वार्ता के बाद, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने यूरेनियम की वाणिज्यिक आपूर्ति के लिए एक सिविल न्यूक्लियर समझौता किया। इस समझौते से भारत के जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षित ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जबकि ऑस्ट्रेलिया को अपने समृद्ध यूरेनियम संसाधनों से आर्थिक लाभ मिलेगा। यह समझौता भारत‑ऑस्ट्रेलिया रक्षा‑सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं को खोलता है।
नई Zealand के साथ व्यापारिक एवं रणनीतिक सहयोग
न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के आमंत्रण पर मोदी ने दो‑दिन की यात्रा तय की। दोनों देशों ने पहले ही 2025 में किए गए उच्च‑स्तरीय संवाद के आधार पर मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस दौरे में आर्थिक, व्यापारिक और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को तेज़ करने के साथ‑साथ भारतीय प्रवासियों के साथ संवाद भी किया जाएगा। लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठकों में कृषि, क्रीडा, शिक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में नई पहलों की रूपरेखा तैयार करने की आशा है।
इंडो‑पैसिफिक में रणनीतिक महत्व
इंडो‑पैसिफिक में बढ़ते तनाव को देखते हुए, भारत‑ऑस्ट्रेलिया‑न्यूज़ीलैंड के बीच रणनीतिक तालमेल को मजबूत करना इस दौर का मुख्य उद्देश्य है। समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा और आपूर्ति श्रृंखला स्थिरता जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास और बुनियादी ढांचा विकास की संभावनाएँ चर्चा का हिस्सा रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बहु‑देशीय पहल से क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में भारत की स्थिति और भी सुदृढ़ होगी।
भविष्य की राह
तीन‑देशीय दौरे के अंत तक, भारत ने न केवल व्यापार और ऊर्जा में नई संभावनाएँ खोलीं, बल्कि सामरिक साझेदारी को भी नई दिशा दी। आगे के महीनों में दोनों देशों के बीच कई परियोजनाएँ कार्यान्वित होने की उम्मीद है, जिससे न केवल आर्थिक विकास बल्कि क्षेत्रीय शांति भी सुनिश्चित होगी।