विश्व शरणार्थी दिवस 2026 पर चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में UNHCR और SICCI ने शरणार्थियों के लिए नौकरियों और समावेशन को सुदृढ़ करने की अपील की। प्रमुख अधिकारियों ने शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • UNHCR‑SICCI ने शरणार्थियों के रोजगार एवं सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दी।
  • कोडिंग वर्कशॉप जैसे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं, पर रोजगार में ‘शरणार्थी’ लेबल बाधा बनता है।
  • दीर्घकालिक राज्य‑स्तर की नीति और राष्ट्रीय समर्थन की तात्कालिक आवश्यकता है।

चेनई में शुक्रवार को मनाए गए विश्व शरणार्थी दिवस 2026 के समारोह में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) ने दक्षिण भारत वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (SICCI) के सहयोग से ‘United for a Better Tomorrow: Partnerships for Solutions’ थीम के तहत वार्षिक साझेदारी रिपोर्ट जारी की। इस मंच पर शरणार्थियों को रोजगार और सामाजिक समावेशन के अवसर प्रदान करने की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य बातें

UNHCR के फील्ड ऑफिस प्रमुख Satchithananda Valan Michael ने स्वागत भाषण दिया, जबकि UNHCR इंडिया एवं मालदीव मिशन प्रमुख Areti Sianni ने शरणार्थी बच्चों के प्रति एकजुटता और करुणा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार और कई समर्पित साझेदारों के प्रतिबद्धता से शरणार्थियों को कौशल, शिक्षा और सामुदायिक समर्थन नेटवर्क तक पहुंच मिल रही है, जिससे वे अपने भविष्य को स्वयं आकार दे सकते हैं।”

कौशल प्रशिक्षण और चुनौतियाँ

भवनिसागर, पूलुवापट्टी और पुजल कैंपों के बच्चों ने बिना कंप्यूटर के कोडिंग कार्यशालाओं में भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए। इस पहल से तकनीकी साक्षरता में सुधार हुआ, परंतु रोजगार बाजार में ‘शरणार्थी’ लेबल अभी भी एक बड़ी बाधा बना हुआ है। कैंपों के युवा प्रतिनिधियों की चिंताओं को सुनते हुए R. Sadheesh, निदेशक, पुनर्वास एवं NRT वेलफेयर, ने कहा, “हम मान्यता और अवसरों को सुरक्षित करने के लिए लगातार काम करेंगे, पर अभी बहुत काम बाकी है।”

सेलिब्रिटी और सार्वजनिक जागरूकता

अभिनेता‑संगीतकार हिपहॉप तमिझा अधी ने शरणार्थियों के सामने आने वाले मुद्दों पर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा, “शिक्षित शरणार्थियों को अभी भी ‘शरणार्थी’ टैग के कारण उचित नौकरी नहीं मिल पाती। हम अपने संगठन के माध्यम से प्रतिभा स्काउटिंग करेंगे और उन्हें मीडिया उद्योग में अवसर प्रदान करेंगे।”

सरकारी दृष्टिकोण और भविष्य की राह

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के आयुक्त G.S. Sameeran ने कहा, “समाज को शरणार्थियों के दर्द को समझना चाहिए और उन्हें घर जैसा महसूस कराना चाहिए। यह केवल कैंप नहीं, उनका घर होना चाहिए। राज्य, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण आवश्यक है।” इस प्रकार, कार्यक्रम ने नीति निर्माताओं, दाताओं और स्थानीय समुदाय को एकजुट कर शरणार्थियों के लिए संरचनात्मक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान किया।