भारत-Myanmar के बीच 1,643 किमी लंबी सीमा और भू‑राजनीतिक महत्व इसे एक्ट ईस्ट और पड़ोसी‑पहले नीति में प्रमुख बनाता है। दोनों देशों की बढ़ती आर्थिक, सुरक्षा और बुनियादी ढाँचा सहयोग इस रणनीति की रीढ़ है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • म्यांमार के साथ 1,643 किमी लंबी साझा सीमा भारत की सुरक्षा और आर्थिक रणनीति को प्रभावित करती है।
  • ‘एक्ट ईस्ट’ नीति दक्षिण‑पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक पहुँच को विस्तारित करने का लक्ष्य रखती है।
  • चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत म्यांमार के साथ बुनियादी ढाँचा और सुरक्षा सहयोग को तेज़ कर रहा है।

भारत ने अपने ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘पड़ोसी‑पहले’ रणनीतिक ढाँचे के तहत म्यांमार के साथ सहयोग को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाने का इरादा जाहिर किया है। यह कदम केवल राजनयिक स्नेह नहीं, बल्कि भू‑राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा‑सम्बंधी कई पहलुओं को सम्मिलित करता है।

‘एक्ट ईस्ट’ नीति की पृष्ठभूमि

2014 में शुरू हुई ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का मूल उद्देश्य भारत की आर्थिक और रणनीतिक पहुँच को दक्षिण‑पूर्व एशिया तक विस्तारित करना है। यह नीति चीन के ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के प्रतिउत्तर में विकसित हुई, जिससे भारत को क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार मार्ग और सुरक्षा गठबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने का मंच मिला।

भौगोलिक और सुरक्षा महत्व

म्यांमार, लगभग 1,643 किमी (1,020 मील) लंबी सीमा के साथ, भारत के पूर्वी उत्तर को घेरता है। इस सीमा पर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी और जंगल होते हैं, जहाँ विभिन्न विद्रोही समूह सक्रिय हैं। भारत के लिए यह सीमा न केवल सुरक्षा‑सम्बंधी चुनौतियों का स्रोत है, बल्कि सामरिक रूप से चीन के शताब्दी‑स्ट्रेटेजिक‑स्ट्रोक के विरुद्ध एक बफ़र भी है।

आर्थिक सहयोग और बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ

इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत‑म्यांमार गठबंधन कई प्रमुख परियोजनाओं को शामिल करता है, जैसे कि इंदो‑म्यांमार‑थाई (IMT) त्रिपक्षीय राजमार्ग, इंदो‑म्यांमार जल शक्ति परियोजना, और समुद्री कनेक्टिविटी के लिए सिंगापुर‑कोलकाता‑रंगून‑म्यांमार समुद्री मार्ग। इन पहलुओं से दोनों देशों के बीच व्यापार में 2023‑24 में 30% की संभावित वृद्धि की उम्मीद है।

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

म्यांमार के साथ गहरा सहयोग भारत को न केवल दक्षिण‑पूर्व एशिया में आर्थिक मंच पर स्थापित करता है, बल्कि चीन के साथ प्रतिद्वंद्विता में भी एक संतुलन प्रदान करता है। इस रणनीति से भारत को एशिया‑प्रशांत में बहुपक्षीय मंचों जैसे कि ASEAN, East Asia Summit और Quad में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिलता है।

साथ ही, म्यांमार के अंदरूनी संघर्ष, रोहिंग्या संकट और सामाजिक‑राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए, भारत को सतत डिप्लोमिक, मानवीय और विकास‑सहायता के मिश्रित उपाय अपनाने की आवश्यकता है।

समग्र रूप से, भारत‑म्यांमार संबंधों का सुदृढ़ीकरण, ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत, राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के तीनों स्तंभों को एक साथ जोड़ता है।