इशाक दार ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ फोन पर बात कर दोनों पक्षों से तनाव घटाने की मांग की। अमेरिकी हमलों और ईरानी प्रतिप्रहार के बीच क्षेत्रीय स्थिरता बचाने के लिए कूटनीति को प्राथमिकता दी गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पाकिस्तान ने यू.एस. और ईरान को तुरंत शांति की राह अपनाने का आग्रह किया।
  • इशाक दार ने कूटनीति को एकमात्र समाधान बताया, मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका को दोहराया।
  • इज़राइल‑फ़िलिस्तीन के बाद पश्चिम एशिया में तनाव का नया मोड़, क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा।

इस्लामाबाद – पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक दार ने रविवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान को सावधानी बरतने की अपील की। यह बयान अमेरिकी-ईरानी संघर्ष के तीव्र होने के बाद आया, जब दोनों पक्षों ने क्रमशः खाड़ी के कई देशों को लक्ष्य बनाते हुए हवाई हमले किए। दार ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को फोन कर स्थिति पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने का वादा किया।

संघर्ष की वर्तमान स्थिति

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने रविवार सुबह ईरान के खिलाफ लक्षित हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, क़तर और ओमान को लक्ष्य बनाते हुए प्रतिहिंसा की। यह क्रमिक प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ समझौते को समाप्त करने के बाद हुई, जिससे क्षेत्र में तनाव का स्तर नई ऊँचाई पर पहुँच गया।

इशाक दार की कूटनीतिक पहल

इशाक दार ने कहा कि “क्षेत्रीय स्थिरता केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही सुरक्षित की जा सकती है” और पाकिस्तान को मध्यस्थता में “रचनात्मक भूमिका” निभाने की इच्छा दोहराई। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस्लामाबाद‑मॉरक्को समझौते (MOU) के तहत, जो जून 2026 में अमेरिकी‑ईरानी पक्षों के बीच हस्ताक्षरित हुआ, सभी पक्षों को डि‑एस्केलेशन के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

क्षेत्रीय प्रभाव और संभावित परिदृश्य

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई ने अपने पिता आयतुल्ला अली खमेनेई की मृत्यु के बाद पहली सार्वजनिक टिप्पणी में प्रतिशोध की घोषणा की, जिससे आगे की सैन्य प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तनाव को कूटनीतिक चैनलों से नहीं सुलझाया गया तो यह पूरे मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष में बदल सकता है, जिससे तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ेगा।

पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय भूमिका

पाकिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में मध्य-पूर्व में शांति प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। इस बार भी, वह दोनों पक्षों को “विचार‑विमर्श” के मार्ग पर लौटने का आह्वान कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक हितों की रक्षा हो सके।